आचार्य संजीव रूप जनपद फतेहपुर के अमौली नगर पहुँचे। जहॉं उनका जोरदार भाव भीना स्वागत किया गया

बिल्सी:सुप्रसिद्व वैदिक विद्वान ,सुधारक आचार्य संजीव रूप जनपद फतेहपुर के  अमौली नगर पहुँचे। जहॉं उनका जोरदार भाव भीना स्वागत किया गया। आर्य समाज अमौली के वार्षिकोत्सव  में पधारे आस्था टीवी  के संत आचार्य संजीव रूप ने यज्ञ कराते हुए कहा कि” ईश्वर की आज्ञा को मानना सत्संग है। ,” उन्होंने कहा कि यह मनुष्य शरीर वह स्थल है जहां रह कर के जीवात्मा अपने कर्मों के फलों को भोगता है और नए कर्म भी करता है । अब विचार यह करना है कि मेरे नए कर्म कैसे हो ?  नए कर्म ऐसे हो जो बंधन से छुड़ा दे ! अर्थात जो हो गया सो हो गया अब शेष जीवन में कोई भी वेद विरुद्ध कार्य, आचरण ,व्यवहार नहीं करना । जीवन उसी का सफल है जो सावधान होकर के पवित्र कर्म ही करें और भूलकर भी पाप कर्म न करें  ।

उन्होंने कहा कि आत्मा को परमात्मा में आहूत कर देने का नाम भक्ति है ।  ईश्वर को अपना सर्वस्व अर्पित कर देना और फल की आशा के बिना कर्म करते जाने का नाम भक्ति है।  उन्होंने दुःखी मन से कहा कि आज संसार में सत्संग के नाम पर भारी पाखंड फैला हुआ है। आज का आदमी मानवता से, सदाचार से ,भलाई से दूर होता चला जाता है। पूजा पाठ भक्ति इबादत केवल     साधनों के लिए है। बरेली से आए संगीतज्ञ पं मुकेश आर्य ने सुन्दर भजन सुनाए

(नईम अब्बासी रिपोटर)

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