भीषण गन्दगी और मच्छरों के प्रकोप से जनता बेहाल/बूचड़खाने में तब्दील/महामारी फैलने की आशंका से लोग भयभीत 

बदायूँ…………….
उझानी।सूबे की योगी सरकार भले ही उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने का सपना संजोये बैठी हो और शहरों को क्लीन बनाकर स्वच्छ व साफ सुथरा बनाने की कवायद में जुटी हो लेकिन सूबे की योगी सरकार के इस फरमान का नगर पालिका प्रशासन पर कोई असर दिखाई नहीं पड़ रहा है।नगर में चहुं ओर व्याप्त गन्दगी नालियों में बजबजाती कीचड़,चोक पड़े नाले और गली मुहल्लों में लगे कूड़े के अम्बार देखकर तो यही लगता है कि मानों यहाँ सत्ता परिवर्तन के साथ ही। जनता की भावनाओं की परख रखने वाले सूवे के मुखिया योगी आदित्यनाथ का भी पालिका प्रशासन को कोई खौफ नहीं है और वह पूरी तौर पर मनमानी कर जनता के मौलिक अधिकारों का हनन कर रहा है।हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं लेकिन पालिका प्रशासन की हठधार्मिता के चलते नगर के वाशिंदे नरकीय जीवन व्यतीत करने को मजबूर हैं।गन्दगी का आलम यह है कि शहर का कोई गली मुहल्ला उससे अछूता नहीं है।यहां बताते चलें कि शहर महामारी की ज़द में आ चुका था जिसने दर्जनों युवाओं व नौनिहालों को मौत के आगोश में सुला दिया था वावजूद इसके पालिका प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया।मौसमी मिज़ाज बदले इससे पहले पालिका प्रशासन को सतर्क हो जाना चाहिये।कहीं ऐसा न हो कि पूर्व में हुयी घटना की पुनरावृृति न हो जाये ।यदि ऐसा हुआ तो इसकी जिम्मेदारी पालिका प्रशासन की होगी।आपको बताते चलें कि नगर के मानकपुर रोड,अयोध्यागंज,गददी टोला,श्रीनारायण गंज मुहल्लों के अलावा
गांव मानकपुर में चल रहीं चिप्स की भटटियां शहर को बूचड़खाना बनाने में सहायक सिद्ध हो रहीं हैं।पालिका प्रशासन ने गत वर्ष चिप्स की इन भटटियों को चिन्हित करते हुए इन्हें रिहायशी इलाकों से दूर कारोवार करने की हिदायत देते हुए सभी चिप्स कारोबारियों को नोटिस जारी किये थे लेकिन चिप्स की यह भटटियां रिहायशी इलाकों में जस की तस कायम हैं ।नालियों में बजबजाती कीचड़ व चोक नालों के अलावा चिप्स की भटटियों का सड़े गले आलुओं के कचरे से फैली गन्दगी संक्रामक रोगों को न्योता दे रही है जिसकी वजह से मच्छरों का प्रकोप दिन व दिन बढ़ता जा रहा है जिसने लोगों का दिन का सुख और रात की नींद छीन ली है।
क्या कहते हैं गंज शहीदां के वाशिंदे…….?
गन्दगी से परेशान लोगों ने अपना दर्द कुछ यूं बयाँ किया………..
1 आले मुहम्मद ने कहा कि नालों में उगी बड़ी बड़ी घास उग आना इस बात का जीवन्त उदाहरण है कि नाले में लम्बे अरसे से सफाई नहीं हुयी।मच्छरों ने जीना हराम कर रखा है ।इसी नाले में दो वर्ष पूर्व मेहमानदारी में आया अवोध वालक नाले की घास में चला गया था और उसकी मौत हो गयी थी ।
2 वन्दे हसन ने कहा कि समूचा मुहल्ला गन्दगी से अटा पड़ा है और मच्छरों ने रात की नींद हराम कर रखी है ।पालिका प्रशासन से सफाई की गुहार लगाते लगाते लोग आजिज आ चुके हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुयी ।
3 मु० सोहिल ने कहा कि मेंने अपने होश में इस मुहल्ले में इतनी गन्दगी पहले कभी नहीं देखी।अब तो रातों को जागना पड़ता है ।
4 मुहम्मद तारिक का कहना है कि अब तो नरकीय जीवन जीने की आदत सी पड़ चुकी है।किससे फरियाद करें कोई सुनने वाला नहीं है।
5 आमिना वेगम का कहना है कि नगर पालिका क्या होती है हम नहीं जानते अगर नगर पालिका होती तो यहां सफाई भी होती।उन्होंने मायूसी जताते हुए पालिका प्रशासन के प्रति गुस्से का इजहार भी किया।बोली क्या नगर पालिका प्रशासन को नालों में खड़ी घास भी दिखाई नहीं देती।
कैसे होगा नगर क्लीन….?
सरकार के स्वच्छता अभियान को कैसे लगेंगे पंख। पालिका प्रशासन को हम सुझाव दे रहे हैं…….
1 शहर को कम से कम पांच भागों में विभाजित किया जाये।
2 प्रत्येक भाग में वर्तमान सफाई कर्मियो के अलावा अतिरिक्त दैनिक वेतन भोगी   सफाई कर्मियों से नियमित सफाई करायी जाये।
3 प्रत्येक भाग में कम से कम दो फागिंग मशीन के द्वारा कीटनाशक दवाईयों का छिड़काव कराया जाये।
4 सभी भागों में लगायी गयी फागिंग मशीनों में मात्र मिटटी का तेल ही नहीं वल्कि कीटनाशक दवाईयो का इस्तेमाल किया जाये।
5 फागिग मशीनों का इस्तेमाल बाईको से किया जाये ताकि गली मुहल्लों में फागिंग आसानी से हो सके ।
6 नाले व नालियों में सफाई के उपरांत कीटनाशक दवाईयों का नियमित छिड़काव हो ।
7 यह क्रम तब तक न टूटे जब तक शहर से गन्दगी का सफाया न हो जाये।
(रिपोर्टर अंजार अहमद)

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