मालपुर ततैरा वन मे लाखो रुपये की लागत से लगे पौधे बिलुप्त/ विभाग भी नही दे सका सटीक जानकारी

बदायूँ…………..
दहगवां ।  शासन को लाखो रुपये का चूना लगाना बिभागीय अफसरो को आम बात हो गयी है बह शासन के फरमानो को नजरान्दाज करते हैं अौर अपने फायदे के लिए चूना लगाने मे कोई कसर नही छोडते ऐसा ही मामला मालपुर ततैरा बन का है जहां लाखो रु खर्च करने के बाबजूद पौधे बिलुप्त हो गये इतना ही नही पेडो का कटान जारी रहता है जिसे बिभागीय अधिकारी अनदेखा करते आ रहे हैं जबकि इस बिशाल बन मे लाखो रुपये की बेशकीमती लकडी है जिसे खुद माफिया बन बिभाग के अधिकारियो से मिलकर काट रहे हैं ऐसा नही है कि इस कटान की जानकारी पुलिस को नही है जानकारी होते हुए भी पुलिस बन कर्मियो के आगे बौना साबित होती है।
थाना जरीफनगर स्थित विशाल मालपुर ततैरा के वन मे पिछले बर्ष जुलाई 2016 मे पूर्व राज्य मन्त्री श्री अोमकार सिंह यादव , डीएम व आला आधिकारियो की मौजूदगी में वन खण्ड की 10 हैक्टेयर जमीन मे 12500 पौधो को रोपित किया गया था इतना ही नही पौधो की सुरक्षा के लिए फैनशिंग तार भी लगाया गया था जो कि अब वन मे से तार भी नदारद है जो कि काफी मात्रा मे लगा था इसके अलावा पौधे भी नष्ट हो चुके है जब इसकी जानकारी वन मे तैनात सिपाहियो से ली गयी तो वह सटीक जबाब नही दे सके इसकी जानकारी जब गांव सूरतनगला के अमित कुमार ने कार्यालय प्रभारी निदेशक सामाजिक बानिकी प्रभाग से मांगी तो बहां से 7 हैक्टेयर मे 4375 पौधे लगाने का जबाब मिला जबकि वन बिभाग की जमीन दस हैक्टेयर मे 12500 पौधे लगाये गये थे जिस पर कुल लागत 2,65937 दर्शायी गयी है
बताते चले कि वन कर्मियो का कहना है कि गांव सिबारक के कुछ लोगो ने वन की भूमि पर अबैद्य कब्जा कर रखा है लेकिन सूचना बिभाग की रिपोर्ट के मुताबिक वन की भूमि पर किसी भी कास्तकार का कब्जा नही है जबकि वन सिपाही मुकेश कुमार आये दिन ग्रामीणो को अबैद्य कब्जे के चलते उनको परेशान करता है अौर उनसे अबैद्य बसूली भी करता है ना देने पर उनके खेतो मे वन लगबाने की धमकी भी देता है इसके अलावा काफी समय पहले वन से काटी गयी शीशम की लकडी भी अभी तक वन बिभाग को नही सौपी गयी है अलबत्ता वह गांव सिवारक मे ही वन के चौकीदार कुन्दन के यहां भारी मात्रा मे पडी हुई है जिसे काफी समय हो गया जब समय अधिक निकल जाता है तो चौकीदार वन सिपाही की मिली भगत से लकडी को नौ दो ग्यारह कर देता है जिसकी अधिकारियो को भनक तक नही लगती यदि गांव का कोई व्यक्ति इस सम्बन्ध मे जानकारी करना चाहता है तो चौकीदार लडने पर उतारु हो जाता है लेकिन बर्ष 2016 मे लगे पौधे कहां गये कुछ नही पता जबकि उनकी देखभाल के लिए वन मे चौकीदार लगे हुए हैं।

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