मुरादाबाद: संक्षिप्त जीवन परिचय-हाजी मोहम्मद उस्मान एडवोकेट। (हिलाल अकबर की रिपोर्ट)

मुरादाबाद बिलारी । वर्तमान में उत्तर प्रदेश पंचायत सामान्य लाभ निधि परामर्श समिति पंचायती राज विभाग उत्तर प्रदेश के दूसरी बार नामित सदस्य, जिला पंचायत व जिला योजना समिति मुरादाबाद के सदस्य, भारतीय प्रधान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिल भारतीय प्रधान संगठन के राष्ट्रीय संरक्षक, उत्तर प्रदेश पंचायत परिषद के प्रदेश महासचिव, ग्रामीण मानदेय कर्मी संयुक्त मोर्चा के संरक्षक, ग्राम पंचायत मोहम्मद इब्राहीमपुर के छठी बार ग्राम प्रधान, मदरसा अजीमुल उलूम जामा मस्जिद व औकाफ कमेटी मोहम्मद इब्राहीमपुर के प्रबंधक एवं मुतवल्ली, तहसील बार बिलारी व जिला बार मुरादाबाद के सदस्य, वार्षिक ईद व होली मिलन समारोह के आयोजक, स्वर्गीय मोहम्मद इस्लाम स्मृति ग्रामीण प्रतिभा पुरस्कार के प्रायोजक, अखिल भारतीय पंचायत परिषद के सदस्य तथा किसान सेवा सहकारी समिति लिमिटेड थांवला के सभापति हैं।
मोहम्मद उस्मान एडवोकेट को मुरादाबाद मण्डल भर का निर्विवाद रूप से सर्वाधिक क़ाबिल, तेजतर्रार, एवं प्रतिभावान पंचायत प्रतिनिधि के रूप में जाना पहचाना जाता है।
राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 509 पर चंदौसी से 15 किलोमीटर उत्तर और बिलारी नगर से 4 किलोमीटर दक्षिण में स्थित सय्यद सालार मसूद गाज़ी के ज़माने की ऐतिहासिकता समेटे गांव मोहम्मद इब्राहीमपुर के एक शिक्षित हाजी मोहम्मद इस्लाम कानूनगो के परिवार में वर्ष 1965 में जन्मे मोहम्मद उस्मान एडवोकेट का नाम किसी से छुपा नहीं है।मोहम्मद उस्मान एडवोकेट ने अपनी प्राथमिक शिक्षा गांव के प्राइमरी स्कूल, जूनियर स्तर की शिक्षा कृषि औद्योगिक जूनियर हाईस्कूल अमरपुर काशी, हाईस्कूल व इंटर तक की शिक्षा राम रतन इंटर कॉलेज बिलारी, स्नातक शिक्षा एस एम कॉलेज चंदौसी, विधि स्नातक की डिग्री के जी के कॉलेज मुरादाबाद तथा स्नातकोत्तर डिग्री हिंदू कॉलेज मुरादाबाद से हासिल की है।उन्होंने अपनी इसी शिक्षा प्राप्ति के साथ ही साथ धार्मिक, सामाजिक, खेल व राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेते हुए घर पर ही उर्दू, अरबी, फारसी, संस्कृत आदि भाषाओं का ज्ञान प्राप्त करते हुए ईसाई, हिंदू और सिख धर्म के ग्रंथों का अध्ययन करने के अलावा अनेक ग्रामीण दस्तकारी कार्यों को भी सीखने का काम किया है।
मोहम्मद उस्मान एडवोकेट ने वर्ष 1980 में सिर्फ 15 साल की उम्र में ही इण्टर पास कर पहले कुछ समय वायु सेना में एयरमैन का प्रशिक्षण लिया।फिर किन्हीं कारणों से वापस गांव आकर युवक मंगल दल, महिला मंगल दल, नेहरू युवा क्लब, क्रिकेट क्लब, ग्राम विकास समिति आदि संगठन बना कर वर्ष 1981 से गांव के बीच खेल, कुश्ती, सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता, श्रमदान, स्वास्थ्य शिविर आदि आयोजनों के माध्यम से अपनी समाजसेवी पहचान बनानी शुरू कर दी।इसी के नतीजे में वो 1983 में दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति लिमिटेड कि गांव में स्थापना करके उसके सभापति, 1984 में गांव की मस्जिद के मुकाबले और मदरसे की प्रबंधक, 1986 में क्षेत्र युवक समिति बलिया खेड़ा के अध्यक्ष व क्षेत्र पंचायत समिति बनिया खेड़ा के नाम सदस्य, 1989 में जिला खेल समिति मुरादाबाद के सदस्य, 1990 ग्रामीण खेलकूद प्रतियोगिता बनिया खेड़ा के ब्लॉक चैंपियन, ग्रामीण खेलकूद प्रतियोगिता मुरादाबाद के जिला चैंपियन, प्रदेश स्तरीय खेल प्रतियोगिता में जिला मुरादाबाद के टीम लीडर, प्रादेशिक विकास दल बनिया खेड़ा के ब्लॉक कमांडर, मानदेय रहित योग प्रशिक्षक बनने के अलावा जिला युवा पुरस्कार प्राप्त कर युवावस्था में ही अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने में कामयाब रहे।
मोहम्मद उस्मान एडवोकेट हमेशा सक्रिय रहकर दूसरों के लिए आदर्श प्रस्तुत करने की भावना के चलते लगातार सक्रिय रहकर 15 वर्षों तक प्रादेशिक दंगल प्रतियोगिता के आयोजक, सहकारिता के क्षेत्र में 5 बार दुग्ध समिति के सभापति, तीन बार थामला किसान सेवा सहकारी समिति के सभापति, कई बार क्रय विक्रय समिति चंदोसी, स्योंडारा सहकारी संघ व बिलारी सहकारी संघ के संचालक, जिला सहकारी बैंक मुरादाबाद, उपभोक्ता भंडार मुरादाबाद, जिला सहकारी संघ मुरादाबाद, इफको, कृभको, पी सी यू आदि के प्रतिनिधि, जिला युवक समिति मुरादाबाद के कार्यवाहक अध्यक्ष, योगसूत्र साप्ताहिक पत्र के संपादक, जनमोर्चा, आर्य भाषा, शाह टाइम्स, राष्ट्रीय सहारा, उत्तर केसरी, नव अमर भारत, राम रहीम आदि समाचार पत्रों तथा सागर और ज्वाला एवं ग्रामीण परिवेश पत्रिकाओं के संवाददाता, तहसील बार बिलारी व जिला बार मुरादाबाद के सदस्य, क्षेत्रीय ईद व होली मिलन समारोह के आयोजक और स्वर्गीय मोहम्मद इस्लाम स्मृति ग्रामीण पुरस्कारों के प्रायोजक भी रह चुके हैं।
मोहम्मद उस्मान वर्ष 1992 में अपनी ग्राम पंचायत के तत्कालीन प्रधान को अविश्वास प्रस्ताव के जरिए 7 के मुकाबले 712 के रिकॉर्ड मतों से हटाकर पहली बार जिलाधिकारी द्वारा ग्राम प्रधान नामित हुए, फिर 1995 में निर्विरोध चुने जाने से लेकर 2015 तक लगातार छठी बार प्रधान पद प्राप्त कर मंडल भर में रिकॉर्ड बना चुके हैं।इस बीच उन्होंने ब्लॉक, तहसील, जिला व प्रदेश स्तर पर सामाजिक गतिविधियों, खेलकूद, पल्स पोलियो स्वच्छता एवं शिक्षा के क्षेत्र में दर्जनों प्रशस्ति पत्र प्राप्त करने के साथ ही क्षेत्र में पंचायत विशेषज्ञ या पंचायत पितामह जैसी उपाधि भी पा ली है।वे हमेशा से ही कथनी के बजाय करनी और खुद को सुधारने पर जोर देते हुए दूसरों के सामने उदाहरण बनने का प्रयास करते रहते हैं।
मोहम्मद उस्मान एडवोकेट ने सबसे पहले अपने गांव को स्वच्छ, साक्षर और शांत बनाने प्रयास किया।उनके प्रयासों और साथियों के सहयोग से गांव मोहम्मद इब्राहिमपुर 1990 से 2005 तक वाद रहित रह चुका है।आज भी अगर उनके गांव को देखा जाए तो इस गांव में लागू की गई पंचायती राज व्यवस्था के कई काम राष्ट्रीय स्तर तक अपनाए गए हैं। उन कामों में कम समय में शत-प्रतिशत पोलियो बूथ कवरेज प्राप्त करना, सर्व शिक्षा अभियान में शत-प्रतिशत पात्र बच्चों का नामांकन, मिड डे मील के अनाज, राशन कार्ड, सामाजिक पेंशन, अन्नपूर्णा कार्ड, BPL कार्ड, अंत्योदय कार्ड, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कार्ड आदि का शिक्षा, स्वास्थ्य व सफाई कार्य से जोड़ना, शुष्क शौचालयों को जल प्रवाहित शौचालयों में बदलना, मैला उठाने की प्रथा को पूरी तरह समाप्त कर मैला उठाने के काम में लगे लोगों का पुनर्वास करना, प्रत्येक विवाद का निस्तारण समझौते के आधार पर गांव में करके गांव को वाद रहित बनाना, धर्म के जरिए नैतिकता का प्रचार करना, युवाओं को शिक्षा, योग, खेल व कोचिंग में वांछित सहायता उपलब्ध कराना, जुआ, शराब, ताश, लूडो व समय बिगाड़ खेलों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना, अनैतिकता में लिप्त लोगों को ना सुधरने पर दंडित करना, अंदरूनी रास्तों पर अतिक्रमण समाप्त कराने अभियान चलाना, आबादी क्षेत्र को गंदगी मुक्त करना, जल निकास नालियों को उपलब्ध तालाबों से जोड़ना, आबादी के आसपास परिक्रमा मार्ग विकसित करके सीमावर्ती गांवों से जोड़ना, राज्य वित्त, ग्राम निधि, विद्यालय विकास निधि, अतिरिक्त कक्ष निर्माण, नवीन विद्यालय भवन निर्माण, जवाहर रोजगार योजना, मनरेगा, आदि के धन का ग्रामीणों की सहमति व सहयोग से सदुपयोग करना, दहेज, डी जे, नाच गाना, अश्लीलता, नशाखोरी आदि के विरुद्ध अभियान चलाना, विद्युतीकरण, सोलर स्ट्रीट लाइट, सीसी रोड, सीसी टायल्स, वृक्षारोपण, ड्राइविंग? दुधारू पशु पालन, सहकारी व बैंकिंग सुविधाओं का लाभ, समस्त घरों में बैंक खाते, मनरेगा कार्ड, बीमा कार्ड, श्रमिक कार्ड, लैपटॉप, शादी अनुदान, राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ, कन्या विद्याधन, आंगनवाड़ी, एएनएम, आशा आदि का बेहतर लाभ दिलाना, ऐच्छिक सफाई कर का सफाई में उपयोग करना प्रमूख हैं।
मोहम्मद उस्मान एडवोकेट व उनके गांव को इन्हीं गतिविधियों में अच्छा काम करने के मद्देनजर कई पुरस्कारों के लिए जिला व राज्य स्तर पर नामित किया जा चुका है।उनके गांव में यूनिसेफ, ऑस्ट्रेलिया व ब्रिटेन आदि के कई अंतर्राष्ट्रीय शोध दलों ने भी यहां की पंचायत व्यवस्था पर शोध कार्य किया है तथा तहसील, जिला, मंडल और शासन स्तर के अनगिनत अधिकारी भी निरीक्षण, भ्रमण या रात्रि विश्राम करके यहां की व्यवस्था को सराह चुके हैं।
इतना सब होते हुए भी यह ग्राम पंचायत ग्राम स्तरीय कर्मियों पर पूर्ण नियंत्रण ना होने, स्थानीय स्तर पर पंचायत की आय के स्रोत शून्य होने, पंचायत घर, सामुदायिक केंद्र, बारातघर, सार्वजनिक शौचालय, स्नानागार कॉन्प्लेक्स नहीं होने, सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान पर अर्थ दण्ड वसूलने की प्रभावी व्यवस्था न होने, माल या फौजदारी मामलों में पंचायत की कानूनी हैसियत ना होने, पंचायत सदस्यों को बैठक में भाग लेने पर भत्ता ना मिलने, बदलते आरक्षण के परिपेक्ष में सीमित कार्यकाल होने, अच्छे कार्यों के लिए सरकार से उचित प्रोत्साहन ना मिलने, बदलते राजनीतिक हालातों में ग्रामीणों को बाहरी राजनीतिज्ञों द्वारा आपसी संघर्ष में फंसा दिए जाने जैसी समस्याओं से यहां भी दो-चार होना पड़ता है।
मोहम्मद उस्मान एडवोकेट ने यूं तो समाज सेवा की शुरुआत सबसे छोटे संवैधानिक पद दलपति जो गांव का  पुलिस प्रशिक्षण प्राप्त युवा वर्दीधारी युवक मंगल दल का पदेन सदस्य होता है से की है।उसके बाद वो युवक मंगल दल का अध्यक्ष जो पंचायत का पदेन सदस्य होता है बने, फिर पंचायत के निर्वाचित वार्ड सदस्य, फिर जिलाधिकारी द्वारा नामित ग्राम प्रधान, फिर निर्विरोध निर्वाचित ग्राम प्रधान, फिर प्रधान संगठन के ब्लॉक अध्यक्ष, फिर संगठन के जिलाध्यक्ष, मंडल अध्यक्ष और वर्तमान में भारतीय प्रधान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन चुके हैं। उन्होंने पंचायती राज व्यवस्था को संविधान प्रदत्त अधिकार दिलाने के लिए कई बेस्ट को सम्मेलनों कार्यशालाओं में भाग लेकर पंचायत प्रतिनिधियों का कुशल नेतृत्व किया है।मोहम्मद उस्मान एडवोकेट ने त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों के साथ साथ पंचायतों में तैनात समस्त मानदेय कर्मियों की समस्याओं को हल कराने के लिए भी मानदेय कर्मी संयुक्त मोर्चा बना कर उन्हें जागृत व संगठित किया है।मोहम्मद उस्मान एडवोकेट लगातार धार्मिक, राजनीतिक, सामाजिक व शैक्षिक आदि क्षेत्रों में हमेशा सक्रिय रहने के कारण प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के सर्वाधिक प्रचारित व्यक्तित्व है।
अपने अंदर समाज सेवा की भावना के बारे में पूछने पर- “मुझे दिल दिया तो तड़प भी दे, जो हो दूसरों का शरीक ए गम, मुझे ऐसे दिल की तलब नहीं जो किसी के काम न आ सके”
संघर्ष के बारे में पूछने पर- “सौ बार उठा उठ के गिरा गिर के उठा हूं,  तब जाके कहीं थोड़ा सा इन्सान बना हूं”
आलोचना के बारे में पूछने पर- “नेक ने नेक जाना बद ने बद जाना मुझे, अपनी अपनी नज़रों से सबने पहचाना मुझे” कहकर सबको प्रभावित करने की कोशिश करते हैं।

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