राणा प्रताप की खुद्दारी,भारत माँ की पूँजी है।ये वो धरती है जहाँ कभी,चेतक की टाँपे गूंजी हैं।।।  

महाराणा प्रताप विकास ट्रस्ट एवं साहित्य दर्पण संस्था के संयुक्त तत्वाधान में  महाराणा प्रताप जयंती एवं भगवान् बुध्द जयंती के उपलक्ष्य में हरिप्रताप सिंह राठौर के आवास पर एक काव्य संध्या का आयोजन किया गया।काव्य संध्या का आयोजन कार्यक्रम के मुख्य अथिति बाबा धनपाल सिंह,विशिष्ट अथिति राजपाल सिंह चौहान,कार्यक्रम अध्यक्ष विष्णु गोपाल अनुरागी,कार्यक्रम आयोजक हरिप्रताप सिंह राठौर एवं कार्यक्रम संयोजक अमन मयंक शर्मा ने माँ सरस्वती,भगवान् बुध्द एवं महाराणा प्रताप के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्प अर्पित कर किया तत्पश्चात कवि आदर्श कुमार समय में माँ सरस्वती की वंदना गान किया-‘हे मात सरस्वती वर दे,वर दे।अंधियारा जीवन से दूर कर दे।’कार्यक्रम अध्यक्ष विष्णु गोपाल अनुरागी ने महाराणा प्रताप को नमन करते हुए पड़ा-‘चढ़ चेतक पर तलवार उठा,रखते थे भूतल पानी को।राणा प्रताप सिर काट काट,करते थे सफल जवानी को।’कार्यक्रम संयोजक,साहित्य दर्पण संस्था के अध्यक्ष इंजी अमन मयंक शर्मा ने महाराणा प्रताप को नमन करते हुए देशभक्ति की रचनाओं से श्रोताओं में देशभक्ति का संचार किया-‘राणा प्रताप की खुद्दारी,भारत माता की पूँजी है।ये वो धरती है जहाँ कभी,चेतक की टाँपे गूंजी हैं।।    पुजारी हैं वही जो राष्ट्र का गुणगान करते हैं।जलाकर देह औरों के लिए दिनमान करते हैं।वहां पर टेकने मत्था स्वयं भगवान् नित आते,जहाँ पर वीर माता के लिए बलिदान करते हैं। जनपद ले वरिष्ठ ओज कवि कुलदीप अंगार ने महाराणा प्रताप को नमन करते हुए पड़ा-‘महावीर राणा स्वाभिमान के प्रतीक थे।शौर्य जन्य चेतना के शुद्ध धर्म लीक थे।’ जनपद के वरिष्ठ कवि भूराज सिंह राजलायर ने पड़ा-‘मर्यादा रक्षित है तब तक मैं  वाद विवाद नहीं करता।पर स्वाभिमान के पृष्ठों पर कोई संवाद नहीं करता।प्रतिकूल परिस्थिति के विरुद्ध संघर्ष किया करता हूँ मैं,मानव जीवन की पीड़ा का भावुक अनुवाद नहीं करता।’ युवा गीतकार आदर्श कुमार समय ने पड़ा-‘धर्म शाश्वत के गौरव की जो खुद ही पहचान है।हिंदुस्तान ही राणा है,राणा ही हिन्दुस्तान है।’ कवि संजय सक्सेना ने पड़ा-‘राणा का बलिदान हिंदुस्तान मानता।न्यौछावर किये प्राण,हिन्दुस्तान जानता। कवि जयवीर चंद्रवंशी ने पड़ा-‘रणक्षेत्र है ये जीवन,दुःख कष्टों से लड़ो तुम।अन्याय को संघारो,और झूठ से डरो तुम।’ कवि अचिन मासूम ने पड़ा-‘जमीं पर आसमाँ को झुकाना जानते हैं हम,लहू निज देश की खातिर बहाना जानते हैं हम।’ इसके आलावा कवियत्री महिमा शर्मा,गौरव पाठक ने भी रचना पाठ किया। अंत में कार्यक्रम आयोजक हरिप्रताप सिंह राठौर ने सभी कवियों को महाराणा प्रताप का चित्र देकर सम्मानित किया।कार्यक्रम अध्यक्ष बाबा धनपाल सिंह ने सभी को राष्ट्रभक्ति एवं समाजसेवा करने की शपथ दिलाई।काव्य संध्या रात्रि 8 बजे प्रारम्भ होकर रात्रि 12 बजे तक आयोजित हुयी।इस अवसर पर हरिप्रताप सिंह राठौर,सुशील कुमार सिंह,राकेश सिंह,सचिन सूर्यवंशी,वीरेंद्र,आज़ाद सक्सेना,सुरेशपाल सिंह चौहान,कैप्टेन आर पी सिंह,दिनेश चंद्र शर्मा,गीता शर्मा,दीपक भरद्वाज समेत तमाम गणमान्य नागरिक एवं श्रोता मौजूद रहे।कार्यक्रम का सफल संचालन इंजी अमन मयंक शर्मा ने किया।

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