लार्ड बेडेन पावेल के जन्मदिवस पर दीप प्रज्ज्वलन करते हुये

बदायूँ………..

अखिल विश्व गायत्री परिवार के तत्वावधान में अम्बियापुर क्षेत्र ग्राम दबिहारी स्थित प्रज्ञा मंडल के कैंप कार्यालय और उसहैत स्थित मां गायत्री इंस्टीट्यूट आॅफ मैनेजमैंट एडं इन्फारमेंशन टैक्नोलाॅजी पर स्काउटिंग के जन्मदाता लार्ड बेडेन पावेल का 160वां जन्मदिवस चिंतन दिवस और लेडी बेडेन पावेल का सेवा दिवस के रूप में मनाया गया। बच्चों ने विभिन्न प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। श्रेष्ठ स्थान प्राप्त बच्चों को प्रशस्ति पत्र और गोल्ड मेडल से नबाजा गया।
गायत्री परिवार के संजीव कुमार शर्मा ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ कराया और कहा कि लार्ड बेडेन पावेल ने सैनिक जीवन के दौरान स्काउट विद्या को भारत से सीखा। दुनियां के बच्चों को स्काउटिंग की शिक्षा दी। खेल-खेल में दुनियां भर के बच्चें इस विद्या सेे जीवन जीने की कला सिखा रहे हंै। बी.पी. ने स्काउटिंग से अभ्यास से बच्चों में छिपी विलक्षण प्रतिभाओं को उभारा। बच्चे श्रेष्ठ नागरिक बनकर राष्ट्र की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बी.पी. का समय जंगल में पशु-पक्षियों को देखनंे, चाकू-कुल्हाड़ी का प्रयोग करने, बिना बर्तन भोजन बनानें, झोपड़ी तैयार करने में बीतता था। यह सब स्काउटिंग की भव्य तैयारी थी। इन्हीं कलाओं ने बी.पी. को सेना में तरक्की के नए अवसर प्रदान किए। बी.पी. ने सन् 1883 में मथुरा (भारत) में आयोजित ‘पिग स्टिकिंग‘ प्रतियोगिता में नायब कादिर कप जीता। यह कप सूकराखेट में सर्व भारतीय ट्राफी के रूप में प्रसिद्ध था। इस खेल में छोटे भाले से जंगली सूकर का शिकार किया जाता था। यह खतरे वाला खेल था। भारत में बी.पी. के पास ‘बीटल‘ नाम का कुत्ता और ‘पेशन्स‘ नाम की घोड़ी थी। सेना के प्रयोगार्थ सन् 1884 में पहली पुस्तक ‘रिकोनेसैन्स एण्ड स्काउटिंग‘ लिखी। यह स्कूलों में बहुत लोक प्रिय हुई। बी.पी. ने बीस बच्चों का पहला प्रयोगात्मक शिविर ब्राउन्सी द्वीप आईलैंड कैम्प में 29 जुलाई से 09 अगस्त 1907 तक लगाया गया। इस शिविर की गतविधियों को स्काउटिंग फाॅर व्याज पुस्तक संयोजा। इस पुस्तक ने विश्व के युवाओं को प्रभावित किया। बीपी को दोनों हाथों से चित्र बनाना, लिखना, अभिनय करना, नौका चालन, प्रकृति भ्रमण, घुड़ सवारी करने का बहुत शौक था।
एपीएस कालेज के मृत्युंजय शर्मा ने कहा कि बीपी ने बोअरों से युद्ध में मुकाबला करने के लिए बच्चों को नन्हें सिपाही के रूप में तैयार किया। यह युद्ध 13 अक्टूबर 1899 से 17 मई 1900 तक चला। बच्चों की सहायता से बीपी ने मैफकिंग का घेरा तोड़ा और युद्ध में विजय हासिल की। समाजसेवी भवेश शर्मा ने कहा कि क्रिस्टिल पैलेस में चार सितम्बर 1909 को स्काउट्स रैली हुई। ग्यारह हजार स्काउट्स के बीच 5 लड़कियां भी वर्दी पहने रैली में सम्मिलित हुई। बी.पी. के पूछने पर उन्होंने बताया कि वे ‘वुल्फ पैट्रोल की गल्र्स स्काउट्स हैं। सन् 1910 में प्रथम गाइड कम्पनी शुरू हुई। जिसकी जिम्मेदारी बी.पी. ने अपनी बहन एग्नेस बेडेन पावेल को दी। 22 फरवरी 1889 को जन्मी आलेव सेंट क्लेयर सोम्स के साथ बी.पी. का 1912 विवाह हुआ।
एचबीजीआईसी कालेज के पल्लव कुमार ने कहा कि भारत में सन् 1909 में स्काउटिंग शुभारंभ हुआ। बीपी ने स्काउट मास्टरों के प्रशिक्षण के लिए इंग्लैंड में सन् 1919 में गिलवेल पार्क की स्थापना की। छः अगस्त 1920 को बी.पी. विश्व स्काउट चीफ बनें। लाॅर्ड बेडेन पावेल और लेडी बेडेन पावेल दोनों बम्बई (भारत) में 28 जनवरी 1921 को उतरे। दिल्ली, इलाहाबाद, जबलपुर, लखनऊ, रांची और मद्रास का विस्तृत भ्रमण किया। समाजसेवी अपूर्व माहेश्वरी ने कहा कि बी.पी. ने 1922 में ‘रोवरिंग टू सक्सैस‘ पुस्तक का लिखी। 1930 में लेडी बेडेन पावेल विश्व गाइड चीफ बनीं। बी.पी. ने 1941 में 83 वर्ष 10 माह और 17 दिन का शानदार जीवन जीकर संसार से अन्तिम विदा ली। लार्ड बेडेन पावेल ने दुनियां को यदि कुछ दिया तो वह स्काउटिंग थी। बच्चों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इस मौके पर देवेंद्र पाल, सोनू, मुरारी, गोविंद आदि मौजूद रहे।
इधर उसहैत के मां गायत्री इंस्टीट्यूट आॅफ मैनेजमैंट एडं इन्फारमेंशन टैक्नोलाॅजी के मुख्य कार्यालय पर स्काउटिंग के जन्मदाता लार्ड बेडेन पावेल का जन्मदिवसोत्सव मनाया गया। बच्चों ने कार्यक्रम प्रस्तुत किए। मां गायत्री इंस्टीट्यूट के पंकज कुमार ने कहा कि खेल-खेल में आज भी दुनियां भर के बच्चों को जीवन जीने की कला सिखा रही है। यह विश्व का पहला बच्चों का वर्दीधारी संगठन है। जो दूसरों की निःस्वार्थ सेवा की लिए समर्पित है। विश्व पटल पर जब भी प्राकृतिक आपदाएं और विपŸिायां आती हैं बच्चों ने अपनी जान की बाजी लगाकर गरीब-असहाय लोगों सहायता के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। अमन जैन ने कहा कि बी.पी. ने बच्चों को स्काउटिंग कला सिखाकर उनमें छिपी विलक्षण प्रतिभाओं को उभारा। जो आज श्रेष्ठ नागरिक केे रूप में अपने राष्ट्र की सेवा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इस मौके पर रामनिवास शर्मा, हेमंत, रीना शर्मा, सौम्या शर्मा, आरती शर्मा, दीप्ति, खुशहाली, आरब, कार्तिक, अमन जैन आदि मौजूद रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *