श्री एम. वेंकैया नायडू ने कहा, स्मार्ट सिटी का विकास राज्यों सरकारों और नागरिकों का साझा दृष्टिकोण, यह केंद्र द्वारा थोपा गया नहीं

मंत्री महोदय ने शहरी मिशन के अंतर्गत तेजी के साथ परियोजनाओं के शुभारंभ और उन्हें लागू करने के लिए राज्य सरकारों की सराहना की

 श्री नायडू ने कहा, सिर्फ 39 प्रतिशत जेएनएनयूआरएम परियोजनाएं समय पर पूरी हो पाईं, जबकि नए मिशन के अंतर्गत 47 फीसदी परियोजनाएं लागू की जा रही है

 जोर देते हुए कहा कि स्मार्ट सिटी योजनाओं से सभी योजनाओं को फायदा होता है, इसके लाभ महज कुछ क्षेत्र या कुछ लोगों तक सीमित नहीं हैं

 देश का पहला शहरी स्तरीय एकीकृत कमान एवं नियंत्रण केंद्र 25 जून से चालू हो जाएगा

  शहरी विकास मंत्री श्री एम. वेंकैया नायडू ने आज जोर देकर कहा कि स्मार्ट शहरों का विकास नागरिकों और संबंधित राज्यों सरकारों का साझा दृष्टिकोण है, इसे केंद्र द्वारा थोपा नहीं गया है।  स्मार्ट सिटी मिशन को लेकर पिछले कुछ समय में हुई आलोचनाओं का जवाब देते हुए उन्होंने यहां आज शहरी परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्यशाला में स्मार्ट सिटी मिशन के डिजाइन और उसके उद्देश्यों पर बातचीत की।

 श्री नायडू ने स्पष्ट किया कि क्षेत्र आधारित विकास के लिए चयनित मिशन सिटीज़ के क्षेत्र के विस्तार के लिए मिशन दिशा-निर्देशों में कोई पांबदी नहीं लगाई गई है। यह शहर की सरकारों और नागरिकों पर छोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि वित्तीय संसाधनों के सीमित होने और योजना एवं उसे लागू करने की क्षमताओं के अपर्याप्त होने के चलते बुनियादी ढांचों के अभाव के मद्देनजर मिशन शहरों में अपेक्षाकृत कम क्षेत्र को चुना जा रहा है।

 इसके बाद इस पर श्री नायडू ने विस्तार से बात करते हुए कहा कि तमिलनाडु में वेल्लौर के मामले में शहर के कुल क्षेत्र का 55 प्रतिशत विकास के लिए लिया गया, हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में 24 प्रतिशत और कल्याण-डोंबीविली में 20 प्रतिशत और बहुत से क्षेत्रों में तो शहर के कुल क्षेत्र का 10 प्रतिशत तक ही विकास के लिए लिया गया। जनसंख्या में मामले में हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में शहर के जिस क्षेत्र को विकास के लिए चुना गया वहां शहर की कुल जनसंख्या की 85 फीसदी जनसंख्या रहती है, वहीं आंध्र प्रदेश के तिरुपति में आबादी का यह आंकड़ा 38 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश के वाराणसी में यह 33 प्रतिशत है।

 श्री नायडू ने आगे कहा कि, यह कहना कि स्मार्ट सिटी मिशन में क्षेत्र आधारित विकास से केवल उस क्षेत्र विशेष के लोगों को ही लाभ होगा, बिल्कुल गुमराह करने वाली बात है। यह निश्चित तौर पर कई तरह से अन्य नागरिकों को भी फायदा पहुंचाएगा।

 स्मार्ट शहरों के विकास से आम आदमी कैसे लाभान्वित होगा, इस पर विस्तार से समझाते हुए श्री नायडू ने कहा कि जिन 30 शहरों के नाम आज स्मार्ट सिटी के लिए घोषित किए गए हैं उनमें से 26 ने शहरी गरीबों के फायदा देने के लिए किफायती आवासीय परियोजना का प्रस्ताव दिया है, 26 शहरों में स्कूल एवं आवास परियोजनाएं होंगी जबकि 29 शहर आम आदमियों के लिए सड़क किनारे साइक्लिंग एवं चलने के लिए सड़क चौड़ीकरण को लेकर स्मार्ट सड़क परियोजना शुरू करना चाहते हैं। इन सभी 30 शहरों में एकीकृत कमान एवं नियंत्रण केंद्र बनाएं जाएंगे। इनके माध्यम से विभिन्न शहरों की संस्थाओं के बीच बिजली-पानी जैसे बुनियादी संसाधनों एवं विभिन्न सेवाओं का प्रभावी प्रबंध हो पाएगा।

 मंत्री महोदय ने कहा स्मार्ट सिटी मिशन शुरू होने की दूसरी सालगिरह के मौके पर देश में पहली बार पुणे और नागपुर के कमान एवं नियंत्रण केंद्र को इसी महीने की 25 तारीख को शुरू किया जाएगा।

 मंत्री महोदय ने इन आलोचनाओं को भी सिरे से खारिज कर दिया कि स्मार्ट सिटी मिशन महज वैश्विक प्रौद्योगिकी दिग्गजों के लिए है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी मिशन के दिशा-निर्देशों के तहत स्मार्ट सिटी योजना की कुल लागत का 25 फीसदी तक ही प्रौद्योगिकी के लिए तय किया गया है। ये नियम इस मिशन को प्रौद्योगिकी आधारित मिशन बनने से बचाता है।

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