सपा की साइकिल पंचर, दोनों पहिये अलग-अलग दिशा में: आजदिन भर का घटनाक्रम

नई दिल्ली/लखनऊ: आज समाजवादी पार्टी के लिए बर्बादी का संडे रहा। ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि समाजवादी पार्टी लगभग टूट चुकी है इस बात की सिर्फ औपचारिक घोषणा होना ही बाकी है। आइए हम आपको बताते हैं आज पूरे दिन कब और क्या हुआ।

आज मुलायम सिंह ने अपने द्वारा बुलाई गई बैठक में सीएम अखिलेश के निर्णय को लेकर दु:ख जाहिर किया।  मुलायम ने सीएम अखिलेश के लिए ये तक कह डाला कि जो व्यक्ति बाप का नहीं हुआ वह बात का क्या होगा? साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी है कि किसने कब, कहां किसने भ्रष्टाचार किया है उन्हें सब मालुम है। वहीं, सीएम अखिलेश यादव ने कहा है कि वो पार्टी को टुटने नहीं देंगे।

बैठक में अमर सिंह पर अखिलेश ने कहा कि ये आदमी पिता और पुत्र को लड़ाना चाहता है। ये बीजेपी से मिला हुआ है। नेताजी के खिलाफ जिसने भी कुछ कहा है मैं हमेशा खिलाफ रहा हूं। मैं अपने पिता का उत्तराधिकारी हूं। पार्टी टूटने नहीं दूंगा।

कब क्या हुआ:

6 बजे सुबह: सपा महासचिव और मुलायम सिंह यादव के भाई रामगोपाल यादव ने रविवार तड़के पार्टीं के कार्यकर्ताओं को एक चिट्ठी लिखी। इसमें उन्‍होंने लिखा, ‘वक्त आ गया है कि कार्यकर्ता अखिलेश के साथ रहें। अखिलेश को हराने की साजिश हो रही है। मध्यस्थता करने वाले ही पार्टी को दिगभ्रमित कर रहे हैं। विरोधियों की सोच नकारात्मक है।’

7 बजे सुबह: रामगोपाल यादव की यह चिट्ठी सोशल मीडिया में वायरल हो गई। सपा के कार्यकर्ता और नेता अखिलेश यादव, शिवपाल यादव और मुलायम सिंह के घर के बाहर जुटनेे लगे।

9:30 बजे सुबह: मुलायम सिंह यादव ने सपा के वरिष्‍ठ नेताओं को लखनऊ के पांच विक्रमादित्‍य मार्ग स्‍थित अपने आवास पर बुलाया। सपा के राष्‍ट्रीय उपाध्‍यक्ष किरनमय नंदा, यूपी विधानसभा अध्‍यक्ष माता प्रसाद पांडेय, राज्‍यसभा सांसद नरेश अग्रवाल, रेवती रमण सिंह और बेनी प्रसाद वर्मा मुलायम सिंह यादव के घर पर पहुंचे। इन सभी नेताओं को जिम्‍मेदारी सौंपी गई थी कि वे अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के बीच समझौता कराएं और पार्टी में जारी अंदरुनी कलह को शांत कराएं। ये सभी नेता किए गए प्रयासों की रिपोर्ट मुलायम सिंह यादव को सौंपने पहुंचे थे।

10:30 बजे सुबह: रामगोपाल यादव की चिट्ठी के बाद पैदा हुए राजनीतिक हालात को देखते हुए मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव ने पांच कालीदास मार्ग स्‍थित अपने सरकारी आवास पर बैठक बुलाई। इसमें शिवपाल यादव और अमर सिंह के करीबी माने जाने वाले 16 विधायकों और 7 विधानपार्षदों को छोड़कर सभी मंत्री, विधायकों और विधानपार्षदों को बुलाया गया। इस बैठक में शिवपाल यादव के करीबी माने जाने वाले मंत्री साहब सिंह सैनी भी पहुंचे, लेकिन उन्हें वापस भेज दिया गया।

11 बजे दिन: मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शिवपाल यादव सहित छह मंत्रियों को बर्खास्त कर दिया। इनमें चार कैबिनेट मंत्री और दो राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) शामिल हैं। वहीं जया प्रदा को भी उनके पद से हटाया गया। बर्खास्त किए गए मंत्रियों में शादाब फातिमा, नारद राय, ओमप्रकाश सिंह, मदन चौहान और गायत्री प्रजापति शामिल हैं। शादाब फातिमा और मदन चैहान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) थे। बाकि चारों कैबिनेट मिनिस्टर थे। मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों की बर्खास्तगी की राज्यपाल को भेज दी।

11:30 बजे दिन: मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने विधायकों और मंत्रियों को संबोधित किया। अखिलेश ने विधायकों से कहा कि वे अपने पिता मुलायम सिंह यादव का बहुत आदर करते हैं, लेकिन कुछ लोग दरार पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। अखिलेश की इन बातों को सुनकर मीटिंग में कुछ विधायक रोने लगे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया कि अमर सिंह के साथ जो भी हैं, वो हटाए जाएंगे।

12 बजे दिन: सूत्रों के हवाले से खबर आई कि बैठक में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 187 विधायकों का इस बात का हस्ताक्षर ले लिया कि वे उनके साथ हैं। अखिलेश यादव ने इस फैसले से शिवपाल खेमे को संदेश दे दिया कि वे ड्राइविंग सीट पर हैं। फिलहाल समाजवादी पार्टी के 224 विधायक हैं।

1 बजे दोपहर: शिवपाल यादव मुलायम सिंह यादव के घर पर मौजूद थे। तभी उनके मंत्री पद से बर्खास्त करने की खबर आई। खबर आते ही शिवपाल यादव ने सारी सरकारी सुविधाएं लौटा दी। यहां तक कि उन्होंने अपने साथ मौजूद सुरक्षाकर्मियों को भी मुलायम सिंह यादव के घर से लौटा दिया।

दोपहर 1:30 बजे: अखिलेश यादव ने पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के सामने सुलह की शर्त रखी।

1- शर्त के मुताबिक अमर सिंह को पार्टी से बाहर निकाला जाए।

2- सभी निष्कासित नेताओं सम्मान के साथ उन्हीं पदों पर वापस लिया जाए।

3- सीएम पद पर मुलायम सिंह उनके नाम की घोषणा करें।

4- टिकट बंटवारे में बिना अखिलेश यादव से विचार किए किसी नाम पर घोषणा न की जाए

5 – कौमी एकता दल और विवादित नेताओं पर सीएम के स्टैंड पर पार्टी उनका साथ दें।

मुलायम सिंह यादव ने इन शर्तों को मानने से साफ इनकार कर दिया।

दोपहर 2 बजे: शिवपाल यादव ने प्रेस कांफ्रेंस की। इसमें उन्होंने रामगोपाल यादव का नाम लिए बगैर उनपर भाजपा के किसी बड़े नेता से तीन बार मिलने का आरोप लगाया। साथ ही कहा कि कुछ अपने लोग ही पार्टी को नुकसान पहुंचाने में जुटे हैं।

शाम 3:30 बजे: अखिलेश यादव के शिवपाल यादव सहित छह मंत्रियों के बर्खास्तगी के जवाब में रामगोपाल यादव को पार्टी से छह साल के लिए निकाल दिया।

शाम 4 बजे: शिवपाल यादव ने दोबारा प्रेस कांफ्रेंस की। इसमेंं उन्होंने रामगोपाल यादव को पार्टी से निकाले जाने की औपचारिक घोषणा की। साथ ही रामगोपाल पर भाजपा का एजेंट होने तक का आरोप लगाया। यह भी आरोप लगाया कि रामगोपाल के बेटे अक्षय और बहू पर सीबीआई के गंभीर आरोप हैं। सीबीआई से अपने परिवार को बचाने के लिए रामगोपाल भाजपा के इशारे पर पार्टी को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इस तरह 10 घंटे में यादव कुनबा टूट गया।

5 बजे शाम: मुंबई में मौजूद रामगोपाल यादव ने पार्टी से निकाले जाने के बाद कहा कि वे पार्टी से निकाले जाने से दुखी नहीं हैं, लेकिन उन्हें इस बात का दुख है कि उनपर बेबुनियाद और झूठे आरोप लगाए गए। साथ ही रामगोपाल ने कहा कि वे पार्टी में रहे या नहीं, वे अखिलेश यादव का समर्थन और मदद करते रहेंगे। इसके थोड़ी देर बाद ही रामगोपाल यादव ने एक चिट्ठी जारी कर ये बातें पार्टी के सामने रखी।

शाम 5:30 बजे: मुलायम सिंह यादव ने अपने आवास पर पार्टी सहित दूसरे दलों के बड़े नेताओं को आमंत्रित किया। यहां बैठक में बिहार की तर्ज पर महागठबंधन बनाने पर चर्चा हुई।

 

24 अक्टूबर: मुलायम सिंह यादव ने यूपी सरकार के सभी मंत्रियों, विधायकों, समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्षों, सांसदों, पूर्व सांसदों, विधायकों, पूर्व विधायकों, महानगर के अध्यक्षों आदि सभी प्रमुख नेताओं को बैठक के लिए बुलाया है। देखना दिलचस्प होगा कि मुलायम सिंह यादव पार्टी और परिवार के इस झगड़े पर क्या फैसला लेते हैं।

साभार वॉइस इंडिया

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