ईश्वर पर विश्वास कर करे कार्य तो अवश्य होते है पूर्ण (शिक्षिका प्रियंका भारद्वाज )

 बदायूँ …………………………. “प्रतिभा अनंत धैर्य है”
दहगवां । धैर्य वह तत्व है जो हमें श्रेष्ठ बनाता है। धैर्य एक ऐसा वाहन है जो अपने सवार को कभी गिरने नहीं देता ना किसी के कदमों में न किसी की नजरों मे धैर्य ही हर चीज की कुंजी है।मुर्गी के अंडे को ही देख लो अंडे को धीरे-धीरे सेने से ही चूजा बाहर निकलता है न कि उसे तोड़ने से कभी भी प्रतिकूल परिस्थितियों में आशा नहीं खोनी चाहिए ।विपरीत परिस्थितियों में संघर्ष मे,कष्ट मे कभी धैर्य नहीं खोना चाहिए ।भगवान शिव का उदाहरण लीजिए उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में ही विषपान किया था। इससे यह पता चलता है कि विष  (कष्ट) हमें महान वनाते हैं ।याद रखिए जो विषपान करने मे सक्षम है वहीं महा पराक्रमी और निर्भम बन सकता है। शिव की तरह कबीरदास जी ने कहा है :- धीरे-धीरे रे मना धीरे सब कुछ होता।।
माली सिंचे सौ घडा, ऋतु आए फल।।
इसका आशय है कि माली चाहे एक ही दिन मे पौधा मे सौ बार पानी डाल दे परन्तु उस पर फूल या फल ऋतु या सही समय आने पर ही आयेगे एक बीज को पौधा बनने मे समय लगता है तो हमे धैर्य रखना चाहिए परन्तु इसका मतलब यह कदापि नही है कि हम कर्म करना बंद कर दे सिर्फ इंतजार करे क्योकि कर्म तो जीवन की अनिवार्य प्रक्रिया है। धैर्य के साथ निर॔तर प्रयास करने से ही मनुष्य श्रेष्ठ बनता है एक गाँव में एक किसान कुआं खोद रहा था दस बारह हाथ कुआं खोदने पर भी पानी नहीं दिखाई दिया , तो उसने सोचा जमीन मे पानी नही है और दूसरी जगह गड्डा खोदने लगा वहां भी दस बारह हाथ खोदने पर पानी नहीं मिला फिर तीसरी जगह फिर , चौथी , पांचवी जगह गड्डा खोदने पर भी पानी नहीं मिलने पर निराश हो गया ।उसे परेशान देख एक संत ने कहा तुमने धैर्य खोकर बार-बार अपना निर्णय बदल लिया मेरी मानो आज तुम धैर्य और लगन के साथ एक ही स्थान पर गड्डा खोदो और जब तक पानी न मिले खोदते जाना किसान ने ऐसा ही किया और बीस हाथ खोदने पर पानी मिल गया ।इसलिए मनुष्य कोई भी काम धैर्य और एकाग्रता और ईश्वर पर विश्वास रखकर करें ।तो उसे सफलता अवश्य मिलेगी ।
श्रीमती प्रियंका भारद्वाज अध्यापिका उच्च प्राथमिक विद्यालय जरीफनगर विकास क्षेत्र दहगवां बदायूं ।

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