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हमारे विषय में :–

आजकल पत्रकारिता के विविध रूप हमारे सामने प्रस्तुत हैं। तकनीकी के निरन्तर विकास से समाचारों का सम्प्रेषण अब दिनों की बात नहीं बल्कि क्षणों की बात हो गयी है। प्रिन्ट मीडिया, इलेक्ट्रानिक मीडिया और सोशल मीडिया ने समाचारों को देश की सीमाओं को समाप्त कर दिया है। विश्व के किसी भी कोने में घटित होने वाली घटना क्षणों में सम्पूर्ण विश्व में व्याप्त हो जाती है। अनेक अवसरों पर इसके महत्त्वपूर्ण लाभ भी हुए। प्राकृतिक अथवा मानवजनित आपदा के क्षणों में मीडिया की सक्रियता से जीवन और सम्पदा की क्षति को असामान्य रूप से कम करने में मदद मिली है। वैज्ञानिक प्रगति के कारण यद्यपि मीडिया तकनीकी रूप से पर्याप्त समृद्ध हो गया है किन्तु प्रायः देखने में आता है कि मीडिया में नैतिक मूल्यों का ह्रास भी हुआ है। मीडिया की निष्पक्षता पर निरन्तर प्रश्न उठाये जाने लगे हैं। प्रारम्भ में जनता रेडियो अथवा अखबारों में मुद्रित समाचारों पर सहज और प्रगाढ़ विश्वास करती थी किन्तु अब समाचारों में सन्दिग्धता देखी जाने लगी है। किसी समाचार पर सहज ही विश्वास नहीं होता। एक ही समाचार को विभिन्न चैनलों द्वारा भिन्न-भिन्न रूप में प्रस्तुत करने के कारण जनता भ्रम की स्थिति में रहती है। जो 'सच' वह जानना चाहती है, वह चारों ओर धुंधले आवरण में लिपटा ही मिलता है। और सन्देह उस समय प्रगाढ़ होने लगता है जब यह चर्चा सुनाई देती है कि समाचार विशेष के प्रकाशन में धन का लेन-देन किया गया है। अर्थात समाचार जन उद्बोधन के प्रति समर्पित न होकर धनोपार्जन के प्रति समर्पित हो गये हैं। समाचारों को अब समाचार के रूप में नहीं बल्कि उसे मसालों में लपेटकर मनोरंजन के रूप में प्रस्तुत किया जाने लगा है। सनसनी जितनी अधिक होगी, आय में भी उसी अनुपात में वृद्धि होगी। देश और समाज पर उसका क्या प्रभाव पड़ेगा, इस पर अधिक चिन्तन नहीं किया जाता। इन्हीं विकृतियों के बीच हमारे कुछ सहयोगियों ने परामर्श दिया कि हमें पत्रकारिता की मान्यताओं और उसके सिद्धान्तों के अनुरूप कुछ नवीन प्रयोग करने चाहिए जिससे पत्रकारिता के विषय में उत्पन्न भ्रान्तियों का कुछ सीमा तक निवारण हो सके और लोगों का जो विश्वास प्राचीन पत्रकारिता में था उसे पुनः जीवित किया जा सके। हमें गणेश शंकर विद्यार्थी, देवेन्द्रनाथ टैगोर, भारतेन्दु हरिश्चन्द्र और

विपिनचन्द्र पाल जैसे पत्रकारों का स्मरण सहज ही हो आया जिन्होंने अपनी पत्रकारिता से सम्पूर्ण भारतीय समाज को झकझोर दिया और ब्रिटिशराज की नींव हिलाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए हमने सर्वप्रथम 'सन टाइम न्यूज' नामक एक समाचार-पत्र का प्रकाशन प्रारम्भ किया। अपने मित्रों और सहयोगियों के निर्देशानुसार हमने यह निश्चय किया कि समाज में जो कुछ भी घटित हो रहा है, उसका प्रकाशन करते समय न तो हम किसी दबाव में रहेंगे और न उसमें हम अपने विचारों का मिश्रण करेंगे। जो समाचार जिस रूप में हमें दिखाई और सुनाई देगा, हम उसे ज्यों का त्यों जनता के सम्मुख प्रस्तुत करेंगे और उसका निर्णय हम जनता पर ही छोड़ेंगे। इसके लिए हमें थोड़ा त्याग करने की आवश्यकता तो पड़ेगी किन्तु हम पीत-पत्रकारिता का आश्रय नहीं लेंगे। हमारे सुधी पाठकों ने हमारे इस प्रयास को इतना सराहा कि हमें अपने क्षेत्र को व्यापक बनाने की आवश्यकता का अनुभव हुआ। इसी सोच के कारण हमने प्रिन्ट मीडिया के साथ-साथ वेबमीडिया को भी जनता के संघर्ष का शस्त्र बनाया। हमारा यह पोर्टल पत्रकारिता की उसी कड़ी का प्रतिफल है जिसे जनसामान्य का स्नेह निरन्तर मिलता रहा है। आशा है कि हमारे पाठकों को समाचारों के प्रति बनी निराशा के वातावरण से बाहर निकलने में हमारा यह पोर्टल सहायक सिद्ध होगा।

Notice:- अगर कोई पत्रकार मीडिया का खौफ दिखाकर आपका शोषण या आपसे अवैध वसूली कर रहा है, तो आप हमें बेझिझक अपनी समस्या बताएं। भ्रष्ट पत्रकार के खिलाफ सुबूत अवश्य दें, ताकि उस भ्रष्ट पत्रकार का चेहरा हम बेनकाब कर सकें।

Email: suntimenews@gmail.com, 9654715596 

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