बदायूँ: अवैध रूप से सरकार द्वारा बनाई जा रही गौशाला के निर्माण को रोकने के लिए उच्च न्यायालय इलाहाबाद में दायर की याचिका।

बदायूं जिलाधिकारी बदायूं के समक्ष प्रार्थीगण ने भूमि गाटा संख्या 531 क्षेत्रफल 931 हे0 व 537 क्षेत्रफल1.008 स्थित ग्राम रफियाबाद थाना विनावर तहसील व जिला बदायूँ के भूमि धर है। और पूर्ण रूप से काविज है उक्त भूमि प्रार्थीगण को उनके पिता स्वर्गीय श्री बृजपाल सिंह से उत्तराधिकार में प्राप्त हुई है। और बृजपाल सिंह को उक्त भूमि उनके पिता बिहारी सिंह के ममेरे भाई रम्मू सिंह पुत्र कुंदन सिंह जिन्होंने ब्रजपाल सिंह को गोद ले लिया था गोदनामें के आधार पर प्राप्त हुई और बृजपाल सिंह के जन्मदाता पिता बिहारी सिंह के पुत्र रघुनाथ सिंह की संतान सूरज पाल सिंह अन्य ने उक्त भूमि को लेकर बृजपाल सिंह के धारा 34 के अंतर्गत तहसीलदार द्वारा की गई दाखिल खारिज को सीओ चकबंदी के समक्ष फर्जी व पंजीकृत वसीयत के आधार पर चुनौती दी जिसको सीओ चकबंदी ने अस्वीकार कर दिया उसके बाद सीओ चकबंदी के आदेश सूरज पाल सिंह ने एसओसी के न्यायालय में चुनौती दी जिसे अस्वीकार करते हुए प्रार्थी गण के पिता स्वर्गीय बृजपाल सिंह की दाखिल खारिज को स्वीकार किया उसके बाद सूरज पाल सिंह आदि ने न्यायालय डीडीसी बदायूँ के समक्ष निगरानी संख्या 66 ब 1983 के द्वारा चुनौती दी डीडीसी बदायूँ ने दिनांक 25-01- 1983 को आदेश पारित करते हुए अवैधानिक तरीके से प्रार्थीगण के पिता के उक्त भूमि में दाखिल ख़ारिज को रेस्ट करते हुए उक्त भूमि को ग्राम सभा के नाम दर्ज करने का आदेश पारित कर दिया लेकिन आज तक ग्राम सभा के नाम अंकित नहीं है। मात्र प्रार्थीगण के साथ खतौनी में आदेश अंकित है क्योंकि  प्रार्थीगण़ ने डीडीसी बदायूँ के न्यायालय आदेश दिनांक 25-1 -1983 को दीवानी रिट याचिका बी नंबर 1964, 1983 देशराज सिंह आज बनाम डीडीसी बदायूँ  उच्च न्यायालय इलाहाबाद के समायोजित की जिसमें उच्च न्यायालय ने आदेश पारित करते हुए डीडीसी बदायूँ को आदेशित किया। दिनांक 25-1- 1983 स्थगित कर दिया और एक स्थगन आदेश दिनांक 04-05- 2005 यथावत प्रभावी रहा। इसके वाद दि० 05-04- 2015 को उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने एकतरफ पैरवी में अपना स्थगन आदेश निरस्त कर दिया क्योंकि प्रार्थीगण की ओर से कोई भी उच्च न्यायालय के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ। यह इसलिए हुआ कि प्रार्थी गण के अधिवक्ता के दौरान लंबन याचिका मृत्यु हो गई। जिसकी कोई जानकारी प्रार्थीगण को नहीं हुई। जानकारी होने पर प्राथीगण  उच्च न्यायालय आदेश के निरस्तीकरण आदेश के विरुध बाजवा नंबर का प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया चूकिं इसी दौरान याची देशराज सिंह और महेश पाल सिंह की भी आकस्मिक मृत्यु हो गई। और उनके स्थान पर उनके उत्तराधिकारी का प्रतिस्थापन प्रार्थना पत्र प्रस्तुत होना था इस कारण बाजवा नंबर पर कोई उचित आदेश पारित न हो सका। परिणाम स्वरूप प्रार्थीगण को उच्च न्यायालय के समक्ष रिट नंबर 2112/ 2019 प्रस्तुत करने की आवश्यकता हुई। उच्च न्यायालय ने दिनांक 28 को जिलाधिकारी को निर्देशित किया है कि वह 2 माह के अंदर प्रार्थीगण द्वारा प्रस्तुत किए जा रहे प्रत्यावेदन पर विधि सम्मत आदेश पारित करें क्योंकि उक्त भूमि पर सरकार की ओर से अवैधानिक तरीके से गौशाला का निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। जो किसी भी दृष्टि से न्यायोचित नहीं है क्योंकि डीडीसी बदायूँ का आदेश अंतिम आदेश नहीं है और इस आदेश को विरुद्ध माननीय उच्चतम न्यायालय के समक्ष प्राथीगण की याचिका लंबित है। और उस पर गुण दोष के आधार पर निर्णय आना अभी बाकी है यह भी संज्ञान में लाना है कि डीडीसी बदायूँ के निर्णय से पूर्व सभी अवर न्यायालय ने प्रार्थीगण के अधिकार को विदित स्वीकार किया है। मात्र डीडीसी बदायूं एकमात्र प्रतिकूल आदेश जो अभी अंतिम नहीं हुआ है के आधार पर प्राथीगण के अधिकारो की हत्या नहीं की जा सकती अतः माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद के रिट सी नंबर 2112/ 2019 में पारित आदेश दिनांक 28-01- 2019 जिसकी प्रमाणित छाया प्रति संगलन है के अवलोकन में प्राथीगण द्वारा प्रस्तुत प्रत्यावेदन विना डिग्री रूप से निष्पक्ष था माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा निर्धारित अवधि में निरस्त करने की कृपया करें। तथा प्रत्यावेदन के निर्णय तक तत्काल प्रभाव से प्राधिकरण की भूमि में अवैध रूप से सरकार द्वारा बनाई जा रही है उस गौशाला का निर्माण रोका जाए ।

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