शाहजहांपुर मे पूर्ति बिभाग की मिली भगत से गरीबों के हक फर डाका (रिपोर्ट-अश्वनी शुक्ला)

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में गरीबो बेसहारा लोगों को सरकार द्वारा मिलने वाली महत्त्वपूर्ण अंत्योदय योजना घोटाले के भेंट चढती नजर आ रही है। शाहजहांपुर जिले में अंत्योदय योजना के तहत गरीबों को मिलने बाला राशन को खुद कोटेदार हड़प रहे हैं। कोटेदारों ने पूर्ति विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत से अंत्योदय कार्ड खुद अपने परिवार के लोगों के नाम करवा लिये हैं। लगातार ग्रामीणों द्वारा राशन घोटाले की शिकायतें बडी मात्रा मे अधिकारियों को प्राप्त हो रही थीं।पूर्ति विभाग और कोटेदारों की मिलीभगत से चल रहे राशन घोटाले इस बड़े खेल में पूर्ति विभाग के कई कर्मचारियों पर गाज गिर सकती हैं। जिलाधिकारी अमृत त्रिपाठी ने 6 सदस्य टीम बना कर मामले की जांच शुरू कर दी है। जिला अधिकारी का कहना है इस मामले में कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
जिला पूर्ति कार्यालय इन दिनों सुर्खियों में आ गया है। दरअसल बंडा ब्लाक के नभीची गांव में दो कोटेदारों ने अपने बेटों के ही अंत्योदय योजना के कार्ड बनाकर तैयार कर गरीबों के राशन पर डाका डालना शूरू किया।लगातार मिल रही शिकायतों पर मीडिया ने जब खबर चलायी तब जिले के आला अधिकारी निंद से जागे ओर अधिकारियों ने मामले की जांच कराई तो घोटाले की एक के बाद एक कड़ी जुड़ती चली गई अकेले बंडा ब्लाक में ही दर्जनों कोटेदारों ने अंत्योदय योजना के कार्ड अपने ही परिवार के लोगों के बनाकर तैयार कर दिए और गरीबों को मिलने वाले राशन को खुद ही हड़प कर गरीबों के राशन की कालाबजारी कर रहे थें। फिलहाल इस खुलासे के बाद अब अधिकारी मामले में कड़ी कार्रवाई की बात कर रहे हैं।
योजना के तहत मिलने वाले गरीबों के राशन के घोटाले का खुलासा होने के बाद जिला पूर्ति कार्यालय और कोटेदारों में हड़कंप मचा हुआ है। जिला अधिकारी अमृत त्रिपाठी का कहना है कि इस मामले में जांच की जा रही है। 6 सदस्यीय टीम गठित कर जल्द जांच पूरी की जाएगी। घोटाला करने वाले अधिकारियों पर बेहद कड़ी कार्रवाई की जाएगी।अंत्योदय योजना के तहत मिलने वाले राशन के घोटाले का मामला अभी तो सिर्फ जिले के एक ही ब्लाक में सामने आया है, लेकिन अगर पूरे जनपद में गहनता से जांच कराई जाए तो यह मामला बहुत बड़े घोटाले के रूप में सामने आ सकता है। इस घोटाले में सिर्फ कोटेदार ही नहीं बल्कि पूर्ति विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल हैं। ऐसे में इस बात की उम्मीद की जा रही है कि इसमें कोटेदारों के साथ-साथ विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों की गर्दन भी फंस सकती हैं।

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