दातागंज: आंवला लोकसभा सीट वसपा खाते में सिनोद शाक्य खेमे में खुशी जैसा महौल। (राजेन्द्र कुमार की रिपोर्ट)

बदायूँ/दातागंज:  लोकसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है और सभी राजनितिक दल जोर शोर से चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं। इस बार प्रदेश में सपा-बसपा गठबंधन कर चुनावी मैदान में उतरेंगे अगर बात करें बरेली की तो यहाँ की दो लोकसभा सीट में दोनों पार्टी एक एक सीट पर अपना प्रत्याशी उतारेंगी बरेली सीट पर जहाँ समाजवादी पार्टी का प्रत्याशी चुनाव मैदान में होगा वहीँ आंवला लोकसभा सीट बसपा के खाते में गई है। आवंला लोकसभा प्रत्याशी वसपा नेता ही तय करेंगें। कि देश की सबसे बड़ी पंचायत में आंवला से कौन पहुंचेगा। दिग्गज नेता पूर्व विधायक सिनोद कुमार शाक्य उर्फ दीपू भईया का नाम वसपा हाईकमान में सबसे आगे है वहीं वसपा सपा समर्थकों में खुशी की लहर है।

दो बार सिनोद कुमार शाक्य दातागंज विधान सभा से विधायक रह चुके हैं। सिनोद कुमार शाक्य का पूरे परिवार ने अपना जीवन समाज के हित में लगा दिया शाक्य के माता-पिता अलापुर नगर पचायत से कई बार अध्यक्ष रहे हैं। बड़े भाई विनोद कुमार शाक्य म्याऊ ब्लाक के ब्लाक प्रमुख रहे है वहीं विनोद शाक्य की पत्नी अर्चना शाक्य जिला पचांयत सदस्य रह चुकी है। पत्नी सुनीता शाक्य ने पिछला लोक सभा चुनाव आंवला सें लड़ा लेकिन भाजपा लहर में पराजय का सामना करना पड़ा था। इस वार अपने पति को चुनाव मैदान में उतारा है। सिनोद कुमार शाक्य की असली ताकत उनके समर्थक है। भले ही वह किसी भी पार्टी से चुनाव लड़े लेकिन उनके समर्थकों उनका कभी साथ नहीं छोड़ते हैं शाक्य ने जब से राजनीति में पैर रखा तब से लगातार वसपा का दामन पकड़े रहे वह विषम परिस्थतियों में भी पार्टी के साथ लगातार कन्धा लगाये खड़े रहे उन्होने जीत के साथ-साथ हार का भी सामना किया। झ्स वार लोकसभा सीट आंवला को गठबंधन में बहुजन समाज पार्टी के लिए छोड़ दिया गया है। मतलब आंवला से बसपा का प्रत्याशी के रूप में सिनोद कुमार शाक्य  मैदान में होगें। वहीं सैकड़ों की संख्या में सपा-वसपा समर्थक रोजाना उनके आवास पर पहुंच रहे हैं। फरीदपुर, बिथरी, आंवला, दातागंज और शेखुपुरा के समर्थकों का हर समय आवास पर जमाबाड़ा देखने को मिलता है लेकिन सिनोद शाक्य को वसपा सुप्रीमों ने दिल्ली बुला लिया हैं।

सिनोद शाक्य की बिरादरी में अच्छी पैठ के साथ-साथ क्षेत्र की सभी विरादरी में अच्छी घुस पैठ है। सिनोद शाक्य अपने पिता स्वा० रामेश्वर दयाल की तरह उन्हें भी राजनीति का माहिर खिलाड़ी माना जाता है। उनके साथ युवा समर्थकों की लंबी चौड़ी भीड़ है। खासकर आंवला लोकसभा का अंसारी मतदाता तो उनके पक्ष में एकतरफा हो जाता है। क्योकि उनके पीए शरीफ अन्सारी इसी विरादरी से तालुकात रखते है। आंवला लोकसभा चुनाव में अन्सारी विरादरी हमेशा निर्णायक मोड़ में रहती है इस विरादारी का झुकाव जिस तरफ होता है वह प्रत्याशी हमेशा भारी रहता है फिलहाल यह तो राजनीति है 23 अप्रैल को ऊंट किस करवट बैठेगा यह तो आने वाला समय ही वतायेगा फिलहाल काग्रेंस ने भी अभी तक पत्ते नहीं खोलें है अगर काग्रेंस ने भी सर्वण प्रत्याशी ऊतारा तो भाजपा के लिए समीकरण गड़वड़ाने की पूरी आंशका वनी हुई है। और समीकरण बदल सकते हैं। फिलहाल आंवला लोकसभा में सिनोद कुमार शाक्य के समर्थक जीत सुनिशित मान रहे है।

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