बदायूँ: होली के उपलक्ष्य में साहित्यिक संस्था ‘शब्दिता’ के तत्वाधान में नमन प्रोफेसर्स कॉलोनी में काव्य गोष्ठी का सरस् आयोजन हुआ/गोष्ठी में सभी ने होली के त्योहार को अपनी उमंग,तरंग भरी कविताओं से व्यक्त किया। 

बदायूँ: शब्दिता की इस गोष्ठी में मुख्य अतिथि साहित्य प्रेमी मुख्य विकास अधिकारी सुश्री निशा अनन्त जी रहीं! उन्होंने इतनी सुंदर,सुव्यवस्थित,शिष्ट और शालीन बैठक में उपस्थित रहने पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की!वे अपने उद्बोधन के दौरान कई बार भावुक भी हो गईं! विशिष्ट अतिथि के रूप में बरेली से सुप्रसिद्ध शायरा सिया सचदेव,डॉ राम बहादुर व्यथित,श्री टिल्लन वर्मा जी उपस्थित रहे!नव स्वर सम्मान उभरते हुए कवि पुष्प राज यादव को प्रदान किया गया!

कवयित्री गायत्री प्रियदर्शिनी ने सरस्वती वंदना से गोष्ठी का आरम्भ किया!फिर इसके बाद
काव्यमय ध्वनियाँ ध्वनित हुईं उससे इस काव्यमयी समागम को ऊँचाइयाँ मिलीं!

शाब्दिता की वरिष्ठ सदस्य मधु राकेश ने इस अवसर पर एक होली गीत प्रस्तुत किया!

डॉ शुभ्र माहेश्वरी वर्तमान विसंगतियों को कविता में व्यक्त किया!

डॉ प्रतिभा मिश्रा,मधु राकेश,उषा किरण रस्तोगी,शिल्पी रस्तोगी,शारदा बावेजा ने
होली से जुड़ी रचनाओं ने सभी के मन को रंगों से सराबोर कर दिया!

श्रीमती मधु शर्मा ने शब्दिता को समर्पित एक कविता पढ़ी!

अंजलि शर्मा ने नारी जीवन की विवशता को कविता में पिरोया!

गायत्री प्रियदर्शनी ने फागुनी बयार को सम्बोधित करते हुए कविता पढ़ी!
गोष्ठी में नवस्वर सम्मान से सम्मानित पुष्प राज यादव ने ग़ज़ल पढ़ते हुए कहा –

मुझे किसी से मुहब्बत हुई भी थी कि नहीं
कभी कभी तो मुझे याद करना पड़ता है

शब्दिता द्वारा अपने साहित्यिक अवदान हिंदी साहित्य को समृद्ध करते आ रहे एवं जनपद के सुनामधन्य बदायूँ के सिद्धहस्त रचनाकार डॉ राम बहादुर व्यथित में काव्यपाठ करते हुए कहा –

खिल उठी है चंद्रिका, नखत लगें अभिराम
जगमग होवे आरती, हर्षित हैं घनश्याम

सन्चालन कर रहीं डॉ सोनरूपा उझानी से पधारे जनकवि के रूप में माने जाने वाले श्री टिल्लन वर्मा को काव्य पाठ के लिए आमंत्रित किया ,उन्होंने कहा-
होली के दिन परदेसी भी घर आ जाते हैं
अपनी मिट्टी की खुश्बू पाकर हर्षाते हैं

बरेली से पधारी सुप्रसिद्ध शायरा सिया सचदेव ने अपनी शायरी से सबका दिल जीत लिया-
उन्होंने कहा-
ये तो अच्छा है कि बेरंग हैं आँसू वरना
किस कदर दाग़ लिए फिरता हमारा चेहरा

डॉ राम बहादुर व्यथित,श्री टिल्लन वर्मा,सिया सचदेव को संस्था द्वारा सम्मानित भी किया गया!
इस अवसर पर कवि अजीत सुभाषित के द्वारा रचित दक्षिणेश्वर माँ की चालीसा का विमोचन सुश्री निशा अनन्त जी द्वारा किया गया!

गोष्ठी में श्रीमती कुसुम रस्तोगी,मंजुल शंखधार छवि रस्तोगी एवं अंजना सिंह की भी सक्रिय उपस्थिति रही!

गोष्ठी का संचालन डॉ सोनरूपा विशाल ने किया!

अंत में सोनरूपा विशाल ने सभी आगंतुकों को आभार ज्ञापित किया!

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