दातागंज सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल/कमीशन खोरी का भी होता है नँगानाच/इलाज करने से पहले ही कर दिया जाता है जिलाअसप्ताल रेफर। (राजेन्द्र कुमार की रिपोर्ट)

बदायूँ: दातागंज………

कमीशन खोरी का भी होता है नँगानाच/प्रसूताओं को झेलनी पड़ती हैं भारी पीड़ा/पैसे न मिलने और कमीशन के चक्कर मे प्रसुताओं को भेजा जाता है ए एन एम संतोष के यहाँ

बदायूं:  दातागंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का है जहाँ एक प्रसूता दर्द से अस्पताल के बाहर तड़प रही थी और चीख रही थी जिसको देखने वालों का तांता लगा था जब वहाँ पर जाकर देखा तो भीड़ ने बताया कि अस्पताल स्टाफ काफी देर से इन लोगों के साथ बददतमीजी कर रहा है जब स्टाफ से बात की तथा अन्य लोगों से पता किया तो पूरा मामला ज्ञात हुआ कि पूरा खेल क्या है- ये  होता है कि कोई भी प्रसूता जब डिलेवरी के लिए अस्पताल जाती है तो अस्पताल में तैनात डॉ. नेहा गुप्ता उनसे सीधे मुँह बात नहीं करतीं हैं इधर- उधर से सांठ -गांठ करके पैसे की डिमाण्ड की जाती है तथा परिजनों को इस तरह से हड़काया जाता है। कि वह लोग कुछ सोंच ही नहीं पाते हैं और उन्हें जिलाअसप्ताल रेफर करने की धमकी दी जाती है यदि वह सुविधा शुल्क दे तो डिलेवरी अस्पताल में ही हो जाएगी यदि सुविधा शुल्क नहीं दिए तो उसे ए एन एम संतोष के यहाँ दातागंज में ही भेजा जाता है बतादें की ए एन एम सन्तोष अपने यहाँ बिना किसी परमिशन के गैरकानूनी तरीके से डिलेवरी करती हैं जिसकी मरीज से एक मोटी रकम बसूली जाती है और उसकी कमीशन अस्पताल में तैनात डॉ को भी दी जाती है इस तरह के धन्धे इस अस्पताल में रोज देखने को मिलते हैं ये लोग गम्भीर मरीज का भी इलाज नहीं करते और अपनी बिना कोशिश किए उसे जिलाअसप्ताल रेफर कर देते हैं जिसकी वजह से कई प्रसुताओं को अपनी जिन्दगी से भी हाथ धोने पड़े हैं।तथा इनकी काली करतूतों का अनुमान इससे भी लगाया जा सकता है कि जिन प्रसुताओं को इन्होंने जिलाअसप्ताल रेफर किया है उनकी डिलेवरी बिना किसी नुकसान के रास्ते मे ही हो जाती है।जब इस मामले में डॉ नेहा गुप्ता से बात की तो उन्होंने अपना जबाब टाल मटोल में दिया उनसे पूंछा गया कि आप एमबीबीएस होते हुए रेफर कर देती हो और  एक एन एम एम संतोष उसकी डिलेवरी कर देती हैं इसका मतलब क्या तो इस पर वह कोई संतोष जनक जबाब नहीं दे पायीं।

फिलहाल आज का मामला दातागंज क्षेत्र के ग्राम बेहटा माधौ का है का जहां के रहने वाले  प्रमोद ने बताया कि वह सुबह पांच बजे अपनी पत्नी को लेकर अस्पताल आया था उसका दर्द बढ़ता गया 10 बजे तक मेरी पत्नी को डॉ नेहा गुप्ता ने नहीं देखा था और न ही जिलाअसप्ताल रेफर किया गया था।पत्रकारों को देखकर मेरी पत्नी सुमन को अब रेफर किया गया है डॉ नेहा गुप्ता ने मुझसे जांच रिपोर्ट माँगी मैं तीन बार इसी अस्पताल में जांच करा चुका हूं लेकिन फिर भी इन्होंने खून की कमी बताते हुए रेफर किया है बतादें की जिस जांच को डॉ नेहा गुप्ता ने देखा था वह तीन महीने पुरानी थी।वहीं बतादें की खून की जांच भी इस अस्पताल में बाहर से ही कराई जाती है।खबर लिखे जाने तक इस प्रसुता की डिलिवरी बिना किसी नुकसान के जिलाअसप्ताल में नार्मल तरीके से हो चुकी थी।

वहीं इस मामले में जब चिकित्सा अधीक्षक डा० देवेन्द्र कुमार से बात करना चाहिए तो वह कैमरे का सामना करने से कतराते रहे और अपने आवास में चले गये और बाइट देने से मना कर दिया।

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