कोरिया: 10 साल तक की फर्जी डिग्री के सहारे नौकरी, मामला सामने आते हुए नौ दो ग्यारह- गुरुर बीईओ ने किया स्कूल का निरीक्षण, दोनो शिक्षाकर्मी नदारद पाए गए- दोनों शिक्षकों ने नौकरी करने शासन-प्रशासन को बीते 10 वर्षो से किया गुमराह- फर्जी डीएड की मार्कशीट के जरिए नौकरी कर रहे।

रायपुर-बालोद जिले के शिक्षा विभाग में फर्जी डिग्रियों से नौकरी करना का बड़ा मामला सामने आया है। मामले की प्रमाण सहित की गई शिकायत में जांच के बाद ऐसे फर्जी शिक्षक पकड़े गए हैं। इससे यह तय हो गया कि बालोद जिले में भी फर्जी डीएड, बीएड सहित अन्य डिग्रियों की मार्कशीट जमा कर शिक्षाकर्मी की नौकरी करने का खेल चल रहा है। विगत 10 वर्षों से वर्ग तीन में शिक्षाकर्मी की नौकरी कर रहे हैं। प्रमाण में मिले फर्जीवाड़े के तहत जिले के गुरुर विकासखंड के ग्राम पंचायत मुड़गहन के आश्रित ग्राम सल्हेभाट के प्राथमिक शाला में फर्जी डीएड की मार्कशीट जमा कर दो शिक्षक बीते 10 वर्षों से वर्ग तीन शिक्षाकर्मी की नौकरी कर रहे हैं। इस मामले के खुलासे के बाद तो अब शिक्षा विभाग सहित अन्य शिक्षाकर्मियों में हड़कंप मचा हुआ है। शिक्षा विभाग भी इन दोनों शिक्षकों पर कार्रवाई करने की भी तैयारी कर ली है। शासन-प्रशासन के साथ धोखाधड़ी करने के इस मामले में दोनों शिक्षकों को जेल भी हो सकती है। मंगलवार को गुरुर बीईओ प्रदीप राय ने स्कूल का निरीक्षण किया तो पाया कि उक्त दोनों शिक्षक बिना जानकारी दिए स्कूल में अनुपस्तिथ हैं। बीईओ श्री राय ने हाजिरी रजिस्टर में गैरहाजिर लिखा हैं। इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी आरएल ठाकुर ने कहा इस मामले को बारीकी से जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

पैसे देकर बना ली फर्जी मार्कशीट-
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक गुरुर ब्लॉक के ग्राम साल्हेभाट के वर्ग तीन के शिक्षाकर्मी भगवती प्रसाद देवांगन व इसी स्कूल के ही वर्ग तीन के शिक्षाकर्मी पद पर पदस्थ चंद्रभूषण बांधे ने फर्जी डीएड की मार्कशीट जमा कर शासकीय नौकरी कर रहे हैं। उन्होंने डीएड किया ही नही हैं। 10 वर्षो से शासन-प्रशासन को गुमराह किए जा रहे हैं।

एक की जांच में मिला इसकी कोई परीक्षा नहीं दी-
इस मामले की जब जांच हुई, तो जांच में पता चला कि चंद्रभूषण बांधे ने जो मार्कशीट जमा किए हैं उसमें सन 2004 में डीएड किए होना बताया गया है, पर जब इस मामले की जांच हुई तो पाया गया कि चंद्रभूषण 2004 में हुए डीएड की परीक्षा में बैठे ही नहीं थे, बल्कि इन्होंने फर्जी मार्कशीट बनवाकर जमा किए हैं। इधर भगवती प्रसाद देवांगन ने तो सन 2006 में खैरागढ़ से डीएड करने का मार्कशीट जमा किया है, पर जब उनकी मार्कशीट की जांच की गई, तो कोई भीमसेन ध्रुव के नाम से निकला, पर वह अनुत्तीर्ण था। इधर भगवती के नाम से उत्तीर्ण होने की मार्कशीट बनाकर नौकरी लग गई है।

7 फरवरी को हुई थी दोनों के खिलाफ शिकायत, विभाग ने थमाया नोटिस-
इस मामले की शिकायत 7 फरवरी 2019 को हुई थी, जिस पर शिक्षा विभाग ने 25 फरवरी को राज्य माध्यमिक शिक्षण संस्थान को इन दोनों शिक्षकों के डीएड मार्कशीट की जानकारी मांगी, जिसमें संस्थान ने रिपोर्ट दी कि जांच में पाया गया है कि चंद्रभूषण ने अभी तक डीएड की परीक्षा ही नहीं दिलाई है। वहीं भगवती प्रसाद का भी मार्कशीट नहीं है। जिस मार्कशीट पर नंबर है वह दूसरे के नाम से है। इधर शिक्षा विभाग ने इन दोनों शिक्षकों को नोटिस भी जारी कर दिया है।

आरोपी शिक्षकों ने कहा आरोप गलत, मार्कशीट सही-
इस मामले में नोटिस मिलने पर दोनों शिक्षकों ने शिक्षा विभाग को जवाब दिए हैं कि उन पर लगे आरोप गलत हैं। उनके द्वारा दिए गए मार्कशीट सही है। भले ही शिक्षक इस आरोप को गलत मान रहे हैं, पर इस मामले में हुई जांच और जांच रिपोर्ट तो इन शिक्षकों को दोषी बता रहे हैं।

जाएंगे जेल या फिर हो जाएंगे बर्खास्त-
अभी तक की जांच में ये बात सामने आई है कि दोनों शिक्षकों द्वारा फर्जी दस्तावेज जमा कर बीते लगभग 10 वर्षों से नौकरी कर रहे हैं। दोनों की पदस्थापना जनपद पंचायत गुरुर ने की थी जिसमें चंद्रभूषण बांधे की पदस्थापना 27 जुलाई 2008 को बिच्छीबाहरा में की गई थी, जिसके बाद ट्रांसफर होकर साल्हेभाट आ गया। साथ ही 27 जुलाई 2008 को ही भगवती प्रसाद देवांगन की भी पोस्टिंग 27 जुलाई 2008 को साल्हेभाट में हुई थी। इस गंभीर मामले के बाद अब दोनों को शासन-प्रशासन को धोखा देने के मामले में जेल या फिर बर्खास्तगी की कार्रवाई की जा सकती है।

दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करेंगे-
जिला शिक्षा अधिकारी आरएल ठाकुर ने कहा इस मामले की जानकारी है। मामले को और गंभीरता से देखकर आगे की कार्रवाई की जाएगी। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करेंगे। शिक्षा के मंदिर को बदनाम करने वालो को बख्शा नही जाएगा।

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