बदायूँ: युवा मंच संगठन जलियांवाला वाले नरसंहार पर दी श्रधांजलि और रखी मांग ।

बदायूँ: 

*पाठ्यक्रम में विस्तृतरूप से जलियांवाला कांड की गाथा को जोड़ा जावे ।
*इंग्लिश मीडियम विद्यालयों बनते जा रहे देश द्रोहि अंग्रेजी पैटर्न का हिस्सा ।
* अब तक जलियांवाला वाले कांड में शहिदों को कोई भी सरकार क्यों नही दे पाई शहीद का दर्जा ।
आज युवा मंच संगठन के नगरध्यक्ष अजय दिवाकर और शिवम शंखधार के नेतृत्व में जलियांवाला नरसंहार भारत के इतिहास में काले दिन की १००वीं वर्ष पूरी हो जायेगी पर बदायूँ शहीद स्थल पर दीप प्रज्वलित और पुष्प अर्जीत कर दो मिनट का मौन रख श्रधांजलि दी गयी ।
इस मौके पर संगठन के संस्थापक ध्रुव देव गुप्ता ‘मनु’ श्रधांजलि देते हुये युवाओं को बताया आज के दिन १०० वर्ष पूर्व जलियांवाला बाग में हुये नरसंहार को भारत के स्वर्णिम इतिहास का वह काला दिन था जिस दिन जनरल डायर के निर्देश पर सैकड़ों निहत्थे भारतीयों को मार डाला गया ठेस निर्मम हत्याकांड की यादें आज भी भारतीयों के दिलों में जिंदा है अंग्रेजों मात्र १० मिनट में १६५० गोलियां दांगी जिसमें इस हत्याकांड में शहीद हुए 484 लोगों की सूची आज भी कार्यालय में लगी हुई है, जबकि जलियांवाला बाग में कुल 388 शहीदों की सूची है। ब्रिटिश राज के अभिलेख इस घटना में 200 लोगों के घायल होने और 379 लोगों के शहीद होने की बात स्वीकार करते हैं, जबकि अनाधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस गोलीकांड में एक हजार से ज्यादा लोग मारे गए और 2000 से अधिक घायल हुए इस हत्याकांड में बूढ़े, बच्चें, जवान, और महिलाएं सब शामिल थें लोगों ने बचने के लिये कुँए छलांग लगानी शुरू कर दी देखते ही देखते कुआँ लाशों से भर गया आज भी यह कुआँ खूनी कुँए के नाम से जाना जाता है देश की आजादी के बाद 55 साल तक शासन करने वाली कांग्रेस की सरकारों ने जलियांवाला बाग के लिए एक ट्रस्ट की स्थापना कर दी। शहीदों की एक यादगार का निर्माण कर दिया, लेकिन यहां शहीदी का जाम पीने वाले सपूतों के बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं करवाई। जलियांवाला बाग हत्याकांड आजादी के बाद शहीदों के परिजन लगातार जानकारी हासिल करने के लिए सरकारी विभागों के दरवाजे खटखटाते रहे। लेकिन सरकार आज तक इस बात की जानकारी भी नहीं जुटा पाई कि शहीदों के नाम क्या हैं। ऐसे में शहीदों के परिजनों का कहना है कि जिन्हें नाम तक नहीं पता, वे शहीद का दर्जा क्या देंगे। जरनल डायर की
जलियांवाला बाग में 13 अप्रैल 2019 को जलियांवाला बाग नरसंहार को 100 साल हो गए, पर लालाजी का परिवार आज भी उन्हें स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा दिलाने के लिए जद्दोजहद कर रहा है। सिर्फ लालाजी ही नहीं, बल्कि कई क्रांतिवीरों को शहीद का दर्जा नहीं मिल पाया है। जलियांवाला बाग में हर साल प्रशासन श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन करता है, लेकिन इसमें हिस्सा लेने के लिए अब तक उन्हें निमंत्रण नहीं मिला नसंहार से पहले ही गुरुनगरी के लोगों और ब्रिटिश हुकूमत के बीच जबरदस्त तनाव बना हुआ था। रॉलेट एक्ट के विरोध में गुरुनगरी के लोग छह अप्रैल से ही विरोध प्रदर्शन कर रहे थे नौ अप्रैल को रामनवमी के पर्व पर पहली बार हिंदू-मुस्लिम समुदाय ने एक साथ झांकियां निकली। ब्रिटिश हुकूमत से यह सहन नहीं हुआ ब्रिटिश सरकार ने उस समय गुरुनगरी के दो बड़े नेता सत्यपाल और सैफुद्दीन किचलू को सेहर से बाहर निकाल कर धर्मशाला के योल कैंप में भेजने के आदेश जारी कर दिए गुरुनगरी के लोगों ने इसका विरोध किया इसके बाद ब्रिटिश हुकूमत ने लोगों पर गोलियां चलाई ऊंचे पुल के नजदीक दस लोगों ने शहादत का जाम पिया। इससे गुस्साए लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया और पांच अंग्रेज अधिकारियों की हत्या कर दी गई
गुस्साए लोगों ने ब्रिटिश हुकूमत की कई इमारत और रेलवे स्टेशन को आग लगा दी थी इसके बाद तत्कालीन पंजाब के गवर्नर ने जरनल डायर को विरोध दबाने के लिए अमृतसर भेजा। 13 अप्रैल को जब गुरुनगरी के लोग ब्रिटिश हुकूमत के विरुद्ध जलियांवाला बाग में विरोध कर रहे थे तब डायर ने बिना कोई चेतावनी दिए निहत्थे भारतीयों पर फायरिंग कर दीउस नरसंहार की यादें आज भी लोगों के जेहन में ताजा हैं आज़ाद भारत के युवाओं को यह ज्ञात होना परम् आवश्यक है कि कैसे आज़ादी के लिये बलिदान दिये कितना सँघर्ष हुआ देश प्रेम की भावना हर युवा में हो आज के दिन को युवा याद रखें स्वर्णिम भारत का यह काला दिन है हम उनलोगों याद कर श्रधांजलि दें रहें जिन्होंने हक़ की लड़ाई के खातिर अपने प्राणों की आहूति दे दी देश परिवर्तन के दौर से गुज़र रहा है और देश प्रेम की भावना को जाग्रत रखने के लिये हमें युवाओं को देश के इतिहास के मानचित्र से जोड़ना होंगा और मांग रखी आजतक जलियांवाला कांड के सभी देश की आजादी के लिए जान देने वाले जलियांवाला बाग के शहीदों के परिजनों को एक शताब्दी बीत जाने के बावजूद भी इंसाफ नहीं मिला है यह देश के शहीदों के परिजनों के लिये दुर्भाग्यपूर्ण है ।
संगठन के नगरध्यक्ष अजय दिवाकर ने कहा कि इंग्लिश मिड्यम स्कॉलो में यह देश के प्रति मरमिटने वालों की गाथाओं का ज़िक्र बहुत न्यूनतम होता जा रहा अंग्रेजों के पैटर्न पर शिक्षा प्रणाली है हर बोर्ड के पाठ्यक्रम में जलियांवाला बाग की यह अमर गाथा विस्तृत रूप में होनी चाहिये और इंग्लिश मीडियम स्कूलों में देश के इतिहास हर गाथाओं को बताया जाना चाहिये जो इंग्लिश मीडियम स्कूल देश के अमर जवानों और शहिदों के गाथा नही बताता है वह देश द्रोही अंग्रेजी पध्दति का प्रचार कर रहा है यह युवा मंच संग़ठन की मांग है  पाठ्यक्रम में जलियांवाले बाग की गाथा विस्तृत रूप में जोड़ी जाये ।
इस मौके पर प्रदीप जी का यह गीत गाकर
ओओ बच्चो तुम्हें दिखाएं झाँकी हिंदुस्तान की
इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की
वंदे मातरम …
जलियाँ वाला बाग ये देखो यहाँ चली थी गोलियाँ
ये मत पूछो किसने खेली यहाँ खून की होलियाँ
एक तरफ़ बंदूकें दन दन एक तरफ़ थी टोलियाँ
मरनेवाले बोल रहे थे इनक़लाब की बोलियाँ
यहाँ लगा दी बहनों ने भी बाजी अपनी जान की ।
ओओबच्चो तुम्हें दिखाएं झाँकी हिंदुस्तान की
इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की
वंदे मातरम …
श्रधांजलि देने वालो में आशिष शर्मा, मौनू शर्मा, अजय दिवाकर, अभिषेक सक्सेना, अनमोल शर्मा, दीपक सक्सेना, शाहिल खान,  शिवम शंखधार आदि उपस्थित रहे ।

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