कोरिया: स्कूलों में मासूमों के हाथ में पेंसिल, कलम की जगह है फावड़ा और तगाड़ी/प्रधानपाठिका के द्वारा स्कूली बच्चों से कराई जा रही मजदूरी/ऐसे में कैसे साकार होगा स्कूल आ पढ़े बर जिनगी ला गढ़े बर का सपना।( वेदप्रकाश तिवारी की रिपोर्ट)

कोरिया/मनेंद्रगढ़। स्कूल में बच्चों से अगर पढ़ाई के स्थान पर काम कराया जाए तो क्या होगा. जाहिर है उससे इन बच्चों का भविष्य खराब होगा, उनका आने वाला जीवन अंधकारमय हो जाएगा। कोरिया जिले के मनेंद्रगढ़ ब्लाक के वार्ड क्रमांक 21 में स्थित माध्यमिक शाला में भी कुछ यूं ही रहा है। यहां एक सरकारी स्कूल की प्रधानपाठिका बच्चों से स्कूल में मजदूरों जैसा काम करवा रही है सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का स्तर सुधारने के लिए सरकार चाहे जितने भी दावे करे, लेकिन स्कूली व्यवस्था इन दावों की पोल खोल देती है। बच्चों का बेहतर भविष्य बनाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार स्कूल आ पड़े बर जिनगी ला गणे बर। जैसे कई स्लोगन के साथ ही शिक्षा का अधिकार, मध्यान्ह भोजन और न जाने कितनी योजनाएं व अभियान चलाकर उन्हें स्कूल जाने के लिए प्रेरित करती है। वहीं दूसरी और कोरिया जिले के मनेन्द्रगढ़ में आने वाले रापाखेरवा में एक ऐसा भी स्कूल है जहां बच्चों से खेतों से मट्टी मंगवाई जा रही है हैरत वाली बात तो यह है कि इस मामले में जब हमने संबंधित स्कूल की प्रधान पाठकों से चर्चा की उन्होंने कैमरे के सामने कुछ भी कहने से मना कर दिया। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि अगर जिस समय बच्चे मिट्टी खोदने जा रहे हैं उसमें अगर कोई घटना हो जाती है तो उसका जवाबदेह कौन होगा। मनेन्द्रगढ़ के वार्ड क्रमांक 21 रापाखेरवा में संचालित पूर्व माध्यमिक शाला में बच्चो हाथ में फावड़ा और गैती लेकर खेतों की ओर जा रहे थे। जब आईएनएच संवाददाता ने बच्चों से पूछा कि तुम्हें खेतों की ओर किसने भेजा है तो बच्चों ने बताया कि उन्हें स्कूल की मैडम ने खेत से मिट्टी लाने के लिए कहा है। बच्चों की जानकारी देन के बाद हम बच्चों के पीछे हो लिए और बच्चे जहां पर खेत में मिट्टी खोद रहे थे वहां पहुंचकर। बच्चों से बात करना चाहिए लेकिन बच्चे कुछ भी बताने से घबराने लगे। इसके बाद स्कूल पहुंचे और स्कूल की प्रधान पार्टी का से चर्चा की तो उनका कहना था कि वे इस बारे में कैमरे के सामने कुछ भी नहीं कह सकती लेकिन हमें जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक स्कूल के किचन घर के बाहर बने गड्ढों को पाटने के लिए बच्चों से मंगवाई जा रही थी कि बच्चों को उनके अभिभावक स्कूलों में पढ़ने के लिए भेजते हैं या इस तरह से काम करवाने के लिए।विकासखंड शिक्षाधिकारी आशीष कुमार नाग का कहना है।
यह मामला संज्ञान में लाया गया है। पूरे मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।

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