कोरिया: कोरिया के द्वारा हायर सेकेंडरी एवं हाई स्कूल के व्याख्याताओं के लिए 28 दिसंबर से 16 जनवरी तक योग का आवासीय प्रशिक्षण का आयोजन डाइट जिला कोरिया द्वारा सलका में किया गया । (वेदप्रकाश तिवारी की रिपोर्ट)

चिरमिरी। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान डाइट कोरिया के द्वारा हायर सेकेंडरी एवं हाई स्कूल के व्याख्याताओं के लिए 28 दिसंबर से 16 जनवरी तक योग का आवासीय प्रशिक्षण का आयोजन डाइट जिला कोरिया द्वारा सलका में किया गया था। उक्त प्रशिक्षण योग के मुख्य योग ट्रेनर अरुण कुमार वर्मा, विश्वजीत पटेल, सुशील गुप्ता तथा डाइट के प्राचार्य योगेश शुक्ला व राधा मोहन प्रसाद के मार्गदर्शन में दिया गया।
योग का प्रथम चरण का प्रशिक्षण 28 दिसंबर से 2 जनवरी तक व द्वितीय चरण का प्रशिक्षण 4 से 9 जनवरी तक व तृतीय चरण का प्रशिक्षण 11 से 16 जनवरी तक आयोजित किया गया। जिसमें योग शिक्षकों के द्वारा व्याख्याताओं को प्रातः 7 बजे से योग का अभ्यास षठ क्रिया में कुंजल क्रिया, जल नेति, नेत्र प्रक्षालन, सूत्र नेति, इसके बाद व्यायाम, सूर्य नमस्कार, आसन में लंबाई बढ़ाने वाले आसन ताड़ासन, तिर्यक ताड़ासन, कोणासन, पादहस्तासन, पश्चिमोतासन, चक्रासन, बैठकर किए जाने वाले आसन वक्रासन, अर्द्धमतसेंद्र आसन, गौमुखासन, अर्कटधर्नुसान, पद्मासन, सिद्धासन, वज्रासन, शशांक आसन, उष्ट्रासन, भुजंगासन, धनुरासन कमर दर्द के लिए विशेष आसनों का शिक्षकों को प्रतिदिन अभ्यास कराया गया। घुटनों के दर्द के लिए सर्वाइकल पीठ दर्द, गर्दन दर्द के लिए आसनों को सिखाया गया।
प्राणायाम में ओम उच्चारण के साथ भस्तिका प्राणायाम, कपालभाति, बाह्य प्राणायाम, अग्निसार, उज्जाई, अनुलोम विलोम, उद्गीत, शीतली, शीतकारी प्राणायाम सिखाया गया। इसके साथ ध्यान भी सिखाया गया। सैद्धांतिक कक्षा में शिक्षकों को 11 बजे से आसनों के लाभ व सावधानियां किन रोगियों को नहीं करना है तथा उस पर विस्तारपूर्वक व्याख्यान दिया गया। योग करने से पहले दिनचर्या पर चर्चा कैसी रखनी है तभी योग के लिए तैयार होना, इसके साथ खानपान पर चर्चा, पतंजलि अष्टांग योग पर विस्तृत जानकारी दी गई। स्वांस पर जानकारी दी गई कैसे लें, कैसे छोड़े। चक्रो पर चर्चा व मानव मूल्य पर व्याख्यान, शरीर तंत्र पर चर्चा अंतः स्रावी ग्रंथियों पर हमारे शरीर पर कितना प्रभाव पड़ता है, उस पर बहुत ही ढंग से चर्चा करके शिक्षकों को अभिभूत किया गया। ताकि शिक्षक अपने विद्यालय में योग को बढ़ाएं और सिखाए जिससे बच्चों का सर्वागीण विकास हो। अरुण वर्मा ने बताया कि आज के परिवेश में योग की अहम भूमिका हो गई है, व बच्चों में बचपन से योगाभ्यास कराया जाए, तो आगे चलकर उनकी जीवनशैली बदल जाएगी। तीन चरण में लगभग सौ शिक्षकों को योग का प्रशिक्षण दिया गया।

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