बदायूँ: मधुवन कालोनी में श्रीमद्भावत कथा में छठे दिन महारास लीला का वर्णन किया गया।

बदायूँ मधुवन कालोनी में चल रही श्रीमद्भावत कथा के छठे दिन कथा व्यास आचार्य पण्डित विशेष शास्त्री जी श्रीधाम वृन्दावन के पावन सानिध्य में भक्तों को कथा श्रवण कराते हुए महारास की लीला का वर्णन किया। कथा व्यास ने बताया सबसे पहले तो रास का सही अर्थ सबको जानना चाहिये रास क्या है आज के समय में लोगो ने रास का गलत अर्थ लगा लिया। जिसको देखो गलत अर्थ लगाकर रास शब्द को गंदा कर रहा है। रास प्रभु श्री कृष्ण का ही रूप है। रास आत्मा व परमात्मा के मिलान का एक मार्ग है। जब तक जीव प्रभु की कथा को सुनेगा नही तब तक जानेगा नही। वो भी कथा सुने भी तो श्री शुकदेव जी कहते हैं कथा कहने का अघिकारी भी वो है। जिसके हृदय पटल पर प्रभु श्री बांके बिहारी विराजमान है उसके मुख से जो परम वैष्णव हो उसके मुख से श्री मदभागवत कथा का श्रवण करे तो पहले सुने उसके बाद अपने मन में प्रभु को विराजमान करे। अपने गुरू का आश्रय ले विरक्ति का भाव मन में प्रगट करे। ब्रज का वास हो चाहे वो मन से ही क्यों न हो। हम रहे कहीं भी बस मन में ब्रज यात्रा चलती रहे यही ब्रजवास है। कथा में भजन में अपनी देह का भास न रहे उसके बाद कहीं जाकर जीव रास में प्रवेश कर सकता है तब कहीं जाकर वो रास की कथा का अघिकारी बन पाता है। ये है रास अपने भीतर गोपी भाव लेकर अपना सर्वस्व अर्पण कर दो। इसी के साथ रूक्मणि विवाह का वर्णन कथा व्यास ने विस्तार पूर्वक किया। सभी भक्तों ने विवाह का आनन्द लिया।
कथा श्रवण करने बाले भक्तों में डा.रातरतन पटेल,अंकित सक्सेना,अतुल श्रोत्रिय,पवित्रा श्रोत्रिय,सोमवती शर्मा,फूलवती शर्मा,संजीव सक्सेना,सुनीता पटेल,मुन्नीदेवी,ओमवती राठौर,डा.जितेन्द्र सिह राना,रत्नेश दुबे,अंशिका श्रोत्रिय,माधुरी मिश्रा,उदयवीर शर्मा,रुपहरि पाठक,गुड्डो पटेल,पुष्पा मिश्रा,निर्मला शर्मा,राजीव सिंह राठौर,रेखा राठौर,रेशम वाजपेयी,जूही सिंह,उपसना शर्मा,विदूषी मिश्रा,ईशा पटेल,अनुराग वशिष्ठ, मानव कुमार शर्मा आदि भक्तगणों ने कथा का रसपान किया ।

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